सरकारी नींद ही तो सबसे बड़ा कांड नहीं?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज

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    • Author, वुसतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान

बैंक ऑफ़ कॉमर्स एंड क्रेडिट इंटरनेशनल (बीसीसीआई) याद है ना. विश्व का सातवां बड़ा बैंक कहलाता था.

73 देशों में 417 शाखाएं थी और फिर 19 वर्ष तक चमात्कार दिखाने के बाद जुलाई 1991 में हवाला और बैक रूम बिजनेस के आरोपों के तले दबकर मर गया.

अकाउंट होल्डर्स को बीस अरब डॉलर का टीका लगा और अगले बीस वर्ष लगे पचहत्तर प्रतिशत डुबी हुई रकम निकालने में.

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का ब्रोकर हर्षद मेहता भी याद आता होगा.

चपत

हर्षद मेहता

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अप्रैल 1992 में सबसे पहले टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने यह बम फोड़ा कि मेहता जी की ब्रोकर कंपनी ने जाली रसीदों पर स्टॉक ट्रेडिंग के ज़रिए तकरीबन आठ वर्ष में लगभग पांच हजार करोड़ का चूूना लगा दिया और भनक भी नहीं लगने दी.

मुंबई हाई कोर्ट ने 27 में से एक मुक़दमे में हर्षद मेहता को पांच साल कैद की सज़ा दी मगर बाकी केसों का फ़ैसला होने से पहले ही हर्षद मेहता जी चल बसे.

2009 का सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज कांड भी आप कहां भूले होंगे.

रामलिंगा राजू भारत की आईटी क्रांति के पोस्टर बॉय. सत्यम की शाखाएं तीस देशों में थी. सत्यम विश्व की जानी मानी नैसडैक एक्सचेंज में भी सूचीबद्ध थी.

अच्छी-ख़ासी इज्ज़त और साख थी. मगर गुरु जी ने चुंधिया देने वाला मुनाफ़ा अकाउंट्स की किताबों में दिखा दिया वो असल था ही नहीं.

सात हज़ार करोड़ रुपए के किताबी हेर-फेर से शेयर मार्केट को 14 हज़ार करोड़ का चाकू लग गया.

राजू जी महराज सात वर्ष के लिए जेल की यात्रा पर चले गए. 32 महीने काट चुके हैं. इसके बाद फिर से सत्यम शिवम सुंदरम.

जुर्रत

रामालिंगा राजु

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इन दिनों पाकिस्तान में एकज़ैक्टली हर आदमी 'एकज़ैक्ट आईटी कंपनी' की बात कर रहा है.

जब से न्यूयॉर्क टाइम्स के डैकलन वाल्श ने जाली डिग्रियों की स्टोरी का हीरो एकज़ैक्ट को करार दिया है तब से हर देशी टीवी चैनल खुद को दूध का धुला समझते हुए एकज़ैक्ट को एकाध चपत मारना ज़रूरी समझ रहा है.

और फिर ये कारोबारी जलन भी कि एकज़ैक्ट वाले अपना टीवी चैनल लाने की जुर्रत भी कैसे कर रहे हैं.

अगर पाकिस्तान सॉफ़्टवेयर एसोसिएशन की बात मान ले तो यह इंडस्ट्री हर साल लगभग ढाई अरब डॉलर का कारोबार करती है लेकिन एकज़ैक्ट के मालिक शोएब शेख़ की बात पर यकीन कर ले तो सिर्फ 18 वर्ष पहले एक कमरे से शुरू होने वाली आज देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी की संपत्ति 20 अरब डॉलर है.

पच्चीस हज़ार मुलाज़िम है तो बीस मुल्कों में कारोबार फैला पड़ा है.

सबसे बड़ा कांड

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एकजैक्ट के सॉफ़्टवेयर और सिस्टम दो अरब लोग विश्व में इस्तेमाल करते हैं.

मगर अजीब बात यह है कि जो दो पाकिस्तानी आईटी कंपनियां देश की सबसे बड़ी कराची स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है उनमें 'एकज़ैक्ट' शामिल नहीं है.

'एकज़ैक्ट', पाकिस्तान सॉफ़्टवेयर एसोसियशन की मेंबर भी नहीं.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सेंट्रल इंवेस्टीगेशन एजेंसी 'एफ़आईएनए' 'एकज़ैक्ट' की रिकॉर्ड की छानबीन शुरू तो कर दी है मगर मेरा एक सवाल है कि दुनिया भर की सरकारें आख़िर ख़ुद से क्यों नहीं जागती और किसी ना किसी अंगले-कंगले पत्रकार को ही उनका कंधा ज़ोर-ज़ोर से पकड़ हिलाना क्यों पड़ता है.

क्या ये सरकारी नींद ही तो सबसे बड़ा कांड नहीं?

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