'काम मिलेगा, शिक्षा मिलेगी, अच्छे दिन ज़रूर आएँगे'

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- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
बाल सफ़ेद हो चले फिर भी कुछ बातें आज तक पल्ले नहीं पड़ीं. जैसे इस बात का क्या मतलब है कि देश में अफरा-तफरी फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. तो क्या किसी ज़माने में गड़बड़ी करने के लिए किसी सरकारी महकमे से परमिट मिला करता था जो अब नहीं मिलता.
गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड की रक्षा के लिए फूलप्रूफ स्क्यिोरिटी का इंतज़ाम किया गया है....यानी आप अगर कोई बेवकूफ आतंकवादी हैं तो प्लीज़ परेड से दूर रहे क्योंकि स्क्यिोरिटी फूलप्रूफ है. और अगर अक्लमंद अपराधी हैं तो स्क्यिोरिटी गेट की बत्ती लाल नहीं होगी.
और ये क्यों लिखा जाता है कि बदनाम डाकू पकड़ा गया ? कुछ डाकू क्या ऐसे भी हैं जिनके बारे में जनता कहे वाह साहब क्या शरीफ और नेकनाम डाकू पकड़ा गया.
सरकार सोती कब है ?

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और ये तो हम में से हर कोई होश संभालने के साथ ही सुन रहा है कि जनता झूठे वादों के जाल में न फंसे.
मगर जनता को बार-बार ये चेतावनी देने वाले किसी भी शुभचिंतक ने आज तक इस जाल का सैम्पल या फोटो नहीं दिखाया जिसे देखते ही हम समझ जाएं, 'अच्छा तो ऐसा होता है झूठे वादों का जाल'. इसी तरह ये बात करोड़ों बार कही गई है कि सरकार देश की तरक्की के लिए दिन-रात जुटी हुई है.
अगर ऐसा ही है तो सरकार सोती कब है ? और अच्छे से सोएगी नहीं तो अगले दिन ठीक से काम कैसे करेगी ? मैंने तो अब तक यही देखा है कि जनता जागती है ताकि हर सरकार अगले चुनाव तक आराम कर सके.
'खुशहाली ज़रूर आएगी,' 'काम सबको मिलेगा', 'शिक्षा सबको बंटेगी', 'सेहत सबको नसीब होगी', 'अच्छे दिन ज़रूर आएंगे'.
क्या कोई उर्दू और हिन्दी की डिक्शनरी से 'गे' का शब्द नहीं निकाल सकता ? जो नेता 'गे' का मतलब भी नहीं जानता हो, उसके वादों पर आम आदमी कितना ऐतबार करे ?
हर काम रॉ और आईएसआई कराती हैं

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पाकिस्तान में हर वो काम जो सरकार की पकड़ में नही आता वो काम रॉ और मोसाद करवा रही होती है. और भारत में हर वो वारदात जो सरकार की झपट से निकल जाती है उसकी ज़िम्मेदार आईएसीआई होती है.
जैसे कोल्ड वार के ज़माने में मॉस्को में शहतीर भी टूट जाती तो उसके पीछे सीआईए का हाथ होता था और वॉशिंग्टन में अगर बस बेकाबू होके फुटपाथ पे चढ़ जाती, तो यही कारण बताया जाता कि दरअसल केजीबी ने बस का स्टीयरिंग ढीला कर दिया था.
मेरा सवाल बस इतना सा है कि गुप्तचर संस्थाएं दुनियाभर में जो कर रही हैं वो न करें तो और क्या करें ?
क्या रॉ पाकिस्तान में घुसने के बजाए हरिद्वार में धूनी रमाके आलती-पालती मार ले या आईएसआई के सब कर्मचारी तवाफ के लिए मक्के चले जाएं और लौट के न आएं.
या आप यह चाहते हैं कि इन खुफिया एजेंसियों की ऑडिट रिपोर्ट मीडिया में छपे कि कितने लोग बरगलाए, कितनी गड़बड़ी फैलाई, कितने घुसपैठिए पकड़े ?
और कितना बारूद और असलाह और पैसा सीमा पार भेजा और बाकी का कहां है ? और सब रसीदें पूरी क्यों नहीं हो रहीं ? क्या यही चाहते हैं आप ?
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