यूपीः 42 दिनों में 41 किसानों की मौत

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- Author, अतुल चंद्रा
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
उत्तर प्रदेश सरकार ने माना है कि बेमौसम बारिश और ओलों की मार से हुए 'नुक़सान से सदमे' के कारण अब तक 41 किसानों की मौत हो चुकी है.
पर सरकार आत्महत्या करने वाले किसानों को इन आंकड़ों में शामिल नहीं कर रही है.
पिछले सप्ताह मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पत्रकार वार्ता में 35 किसानों की सदमे से मौत की पुष्टि की थी. लेकिन किसानों की आत्महत्याओं के सवाल पर उन्होंने कहा था कि अभी हमारे पास इन्हें फसल को हुए नुक़सान से जोड़ने के ज़रूरी सबूत नहीं है.
प्रदेश सरकार ने 44 ज़िलों मे किसानों को सहायता देने के लिये केन्द्र से 1078 करोड़ रुपये मांगे हैं.
घाव पर नमक

लेकिन किसानों की शिकायत है कि उन्हें दिया जाने वाला बेहद कम मुआवज़ा घाव पर नमक लगाने जैसा है.
सरकार से 750 रुपए मुआवज़ा पाने वाले कानपुर के किसान सर्वेश सवाल करते हैं, "क्या होगा इतने रुपये मे?" उनकी तीन बीघा फ़सल पूरी तरह नष्ट हो गई है.
बुंदेलखंड में तो किसानों को 186, 187, 200 रुपए तक का मुआवज़ा दिया गया है. जबकि उनका नुक़सान हज़ारों में है.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मनोज मिश्र ने इसे किसानों के साथ क्रूर मज़ाक बताया है.

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दोहरी मार
कानपुर के चपरहेता गांव के मूसानगर ब्लॉक के चंद्रपाल ने 4 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी. लेकिन आत्महत्या करने वाले ऐसे किसान सरकार के आंकड़ों में शामिल नहीं हैं.
चंद्रपाल की 7.5 एकड़ पर लगी गेंहू की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. अब खेत में सिर्फ़ भूसा ही बचा है.
उनके चचेरे भाई ओंकार सिंह ने बीबीसी से कहा, "आज तक कोई सरकारी अधिकारी यह देखने नही आया है कि चंद्रपाल ने आत्महत्या क्यों की और उनकी फसल को कितना नुकसान हुआ है. लेखपाल की ईमानदारी भी संदिग्ध है."
चंद्रपाल का परिवार अब किसी भी तरह की सरकारी मदद की आशा खो चुका है. आत्महत्या करने वाले ऐसे किसानों के परिवारों पर दोहरी मार पड़ रही है.
एक तो उन्होंने परिवार का कमाऊ सदस्य खोया है दूजे उन्हें कोई सरकारी राहत भी नहीं मिल रही है.

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रिपोर्ट में घालमेल
किसानों का आरोप है कि सरकारी अधिकारी फसलों को हुए नुक़सान को कम बता रहे हैं.
गोरखपुर, जहाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना में बारिश की मार कम पड़ी है, में राजस्व विभाग ने खोराबार ब्लॉक के महीमात गांव मे सिर्फ 10 फ़ीसदी नुकसान की रिपोर्ट दी जबकि ज़िलाधिकारी रंजन कुमार ने खुद निरीक्षण कर 75 फीसदी नुकसान की पुष्टि की है.
हालांकि गोरखपुर मंडलायुक्त राकेश ओझा दावा करते हैं कि सभी अधिकारी किसानों के हित के लिए काम कर रहे हैं.
उनका कहना है कि हो सकता है किसी से कोई ग़लती हो गई हो.
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