'हिन्दू भावनाओं का ख़्याल तो रखना ही होगा'

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अगर आज भारत में गोहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए तो क्या हिंदुओं का बहुमत इसे ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार करेगा?
भारतीय जनता पार्टी अब सत्ता में है और इसलिए गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की आवाज़ देश में एक बार फिर से गूंज रही है.
लेकिन अब तक यह मांग पूरी क्यों नहीं हुई है?
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असल में यह सदियों पुरानी बहस है. ऐतिहासिक रूप से कभी यह एक बड़ा मुद्दा बन कर उभरता है फिर दब जाता है.

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मुस्लिम विद्वान अल-बरुनी 11वीं शताब्दी में भारत आकर 14 साल रहे थे. उन्होंने अपनी किताब में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है.
उनके अनुसार गोहत्या पर प्रतिबंध उस समय भी आम बहस का मुद्दा था.
मुग़ल सम्राट बाबर, अकबर और जहांगीर ने गोहत्या पर पाबंदी लगाई थी. मैसूर के हैदर अली ने भी इस पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद वर्ष 1857 से ये फिर चर्चा का विषय बना.
महात्मा गांधी गोहत्या के ख़िलाफ़ थे. वर्ष 1924 में 'एकता कांफ्रेंस' में गोहत्या पर पाबंदी के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया गया. संविधान के अनुच्छेद 48 में गोरक्षा पर ज़ोर देने की बात की गई है.
इस बात पर कोई मतभेद कभी नहीं था कि गाय हिन्दुओं के लिए पवित्र है और वह इसकी पूजा करते हैं.
भावनाओं का सम्मान हो

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गोहत्या पर रोक लगाने की मांग करने वाले सक्रिय हिंदू सामाजिक कार्यकर्ता एक बार फिर से अपना पक्ष ज़ोर-शोर से सरकार के सामने रख रहे हैं.
इनमें से एक हिन्दू महासभा के मुन्ना कुमार शर्मा हैं, जो कहते हैं, "गाय हमारी माता है हम इसकी पूजा करते हैं. गाय से देश के 85 (उनके आंकड़े) प्रतिशत हिन्दुओं की भावना जुड़ी है, इसका सम्मान होना चाहिए."
पंजाब के सतीश कुमार ने इसके लिए सरकारी पहल का इंतज़ार नहीं किया.
उन्होंने पंजाब और हरियाणा में एक 'गाय संरक्षण दल' का गठन किया है जिसका काम उन वाहनों और कसाइयों पर हमला करना है जो कथित तौर पर गाय के मांस के व्यापार और इसकी हत्या से जुड़े हैं.
वह कहते हैं, "80 प्रतिशत लोग गाय को माता मानते हैं उसके साथ कोई खिलवाड़ करेगा तो लोगों का खून तो खौलेगा. गाड़ियां भी जलाई जाएंगी और कसाइयों की पिटाई भी होगी."
शर्मा और कुमार दोनों गोमांस पर प्रतिबंंध से जुड़े आंदोलन को मुस्लिम या ईसाई विरोधी नहीं मानते.
शर्मा कहते हैं, "काफी संख्या में मुसलमान भी गाय का मांस नहीं खाते और काफी मुसलमान भी गोहत्या पर पाबंदी लगाये जाने के पक्ष में हैं. इसलिए इसे किसी सम्प्रदाय से नहीं जोड़ना चाहिए."

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कुमार भी ऐसा ही मानते हैं लेकिन उनके अनुसार गाय की हत्या से जुड़े लोग अक्सर मुसलमान ही होते हैं.
मोदी को चेतावनी
गोहत्या के पक्ष में सक्रिय कार्यकर्ताओं के अनुसार सम्पूर्ण प्रतिबंध का मतलब है, "गाय, बैल और बछड़े की हत्या, इसका मांस खाने और व्यापार पर पूरी तरह से पाबंदी."
भाजपा के सत्ता में आने के बाद उन्हें उम्मीद बंधी थी कि उनकी मांग पूरी हो जाएगी.
लेकिन मुन्ना कुमार शर्मा नरेंद्र मोदी से बहुत नाराज़ हैं, "दुर्भाग्य की बात है कि मोदी सरकार के आने के बाद गाय मांस का निर्यात पहले से भी तेज़ गति से बढ़ने लगा है."
सतीश कुमार भी मोदी सरकार से खफा हैं, "मैं मोदी साहेब की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं क्योंकि हम सभी गोरक्षकों ने मोदी का प्रचार किया (चुनाव में), इस आशा में कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वह गोहत्या पर पाबंदी लगाएंगे लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं किया."

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वह कहते हैं कुछ महीने के भीतर सभी गोरक्षक अपनी मांग मनवाने के लिए दिल्ली पर धावा बोलने वाले हैं.
शर्मा ने धमकी दी कि अगर भाजपा सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो पार्टी और मोदी का भी वही हाल होगा जो कांग्रेस पार्टी का हुआ, नरेंद्र मोदी को वर्ष 2019 तक का समय दिया गया है.
शर्मा कहते हैं, "अगर 2019 तक मोदी सरकार ने गोहत्या और इसके मांस के निर्यात पर पाबंदी नहीं लगाई तो हम आम चुनाव में उनका विरोध करेंगे और उन्हें सत्ता से हटाने का काम करेंगे."
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