सोशल मीडिया पोस्ट ने इनको पहुंचाया जेल

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सुप्रीम कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की धारा 66A को खत्म कर दिया है.
इस धारा के तहत पुलिस को ये अधिकार था कि वो इंटरनेट पर लिखी गई बात के आधार पर किसी को ग़िरफ्तार कर सकती है.
इस धारा के खत्म होने से इंटरनेट पर कुछ लिखने से जुड़े मामलों में अब तत्काल की जाने वाली ग़िरफ्तारी रुकेगी, जबकि धारा 66A में तुरंत ग़िरफ्तारी का प्रावधान था.
कोर्ट में ये याचिका दिल्ली की एक छात्रा श्रेया सिंघल ने साल 2012 में मुंबई की दो लड़कियों की ग़िरफ़्तारी के बाद दायर की थी.
इस क़ानून के तहत सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर कई लोगों की गिरफ़तारियां हो चुकी हैं.
इनमें से एक लड़की ने शिवसेना नेता बाल ठाकरे की मृत्यु के बाद फेसबुक पर मुंबई के लगभग ठप हो जाने पर सवाल उठाया था, जबकि दूसरी लड़की ने इस कमेंट को लाइक किया था.

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रवि श्रीनिवासन
पॉन्डिचेरी में पुलिस ने एक 46 वर्षीय कारोबारी रवि श्रीनिवासन को गिरफ्तार किया क्योंकि उन्होंने अपने ट्वीट में तत्कालीन भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की आलोचना की थी.
श्रीनिवासन ने कार्ति की संपत्ति को लेकर कुछ टिप्पणियां पोस्ट की थीं और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.
असीम त्रिवेदी

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वहीं कानपुर के रहने वाले असीम त्रिवेदी को मुंबई पुलिस ने दिसंबर 2011 में अन्ना हज़ारे की एक रैली के दौरान कुछ पोस्टर लगाने के लिए ग़िरफ़्तार कर लिया गया था.
इन पोस्टरों में कथित तौर पर नेताओं और संसद का मज़ाक उड़ाया गया था.
हालांकि बाद में व्यापक जनाक्रोश को देखते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया.
असीम ने अपने बनाए कार्टूंस पहले अपनी वेबसाइट पर भी लगाए.
उनकी वेबसाइट को भी तब बैन कर दिया गया था.
ममता का कार्टून

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के कथित आपत्तिजनक कार्टून बनाने और उन्हें सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिये सार्वजनिक करने के आरोप में जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अम्बिकेश महापात्रा को गिरफ्तार किया गया था.
आज़म ख़ान के नाम पर पोस्ट
इस कानून से जुड़ा ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के मंत्री आज़म ख़ान से जुड़ा है.
आजम खान के नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने वाले बरेली के 11वीं कक्षा के छात्र विक्की के खिलाफ सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए गिरफ़्तार करके जेल में डाल दिया गया.
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