डॉक्टर जोड़ा जिसने बनाया सस्ता अस्पताल

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

उत्तरी बिहार के तेजी से उभर रहे हाजीपुर शहर के शोर शराबे के बीच पहली नज़र में लाल और सफेद रंग वाली ये इमारत किसी सरकारी गेस्ट हाउस की तरह लग रही थी.

लेकिन करीब से देखने पर मालूम पड़ा कि लोगों का 'आस्था अस्पताल' में लोगों का तांता लगा हुआ है. यह अस्पताल एक कारोबारी डॉक्टर दंपति चलाता है.

वाजिब कीमतों पर गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के मक़सद से इस जोड़े ने निजी क्षेत्र की ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी थी.

पढ़ें विस्तार से

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

आमतौर पर भारत में ये माना जाता है कि अच्छी मेडिकल सेवा तक केवल उन्हीं लोगों की पहुंच हैं जिनकी जेब में पैसा है.

लेकिन इसी सिलसिले में पेशे से सर्जन अतुल वर्मा और आंखों की डॉक्टर जयश्री शेखर लोगों की राय बदली है.

आखिरकार भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का एक फीसदी ही देश की सेहत की देखभाल के लिए खर्च करता है.

वह दुनिया में स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करने वाले देशों में से है. सभी घरेलू खर्चों को मिलाकर देखें तो 69 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य के नाम पर निकल जाता है.

सरकारी अस्पताल

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

दुनिया भर में कम ही देशों में ऐसा देखने को मिलता है. निजी खर्चों के लिहाज से यह दुनिया के सबसे अधिक खर्च करने वाले देशों में से है. लाखों भारतीय इलाज का खर्च उठाते हुए दिवालिया हो जाते हैं.

हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं सरकार की ओर से मुफ्त में मुहैया कराई जाती हैं लेकिन ग्रामीण आबादी का केवल 22 फीसदी और शहरी जनसंख्या का महज 19 फीसदी ही सरकारी अस्पतालों की सेवाओं तक पहुंच पाते हैं.

बिहार में हालात और भी खराब हैं. सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएँ ढहने की कगार पर हैं.

हालांकि राज्य में 800 सरकारी अस्पताल, प्राइमरी हेल्थ क्लिनिक और तकरीबन दो हज़ार के करीब प्राइवेट नर्सिंग होम या मेडिकल क्लिनिक चल रहे हैं.

डॉक्टरों की स्थिति

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

प्राइवेट नर्सिंग होम को लेकर बनाए गए सरकारी नियम कायदों की धज्जियां उड़ाना कोई अनूठी बात नहीं मानी जाती.

18 हज़ार मरीज़ों के लिए महज एक डॉक्टर की उपस्थिति से मरीज़ों और उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

बेहद गरीब लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा के नाम पर मामूली सरकारी मदद दिए जाने का प्रावधान है लेकिन बिना रिश्वत दिए इसे हासिल कर पाना उतना ही मुश्किल भी है.

एक अनुमान के मुताबिक बाज़ार में मौजूद दो तिहाई दवाएं नकली हैं.

मरीजों का इंतजार

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

सात साल पहले ये डॉक्टर जोड़ा विदेश समेत कई जगहों पर काम करने के बाद अपने राज्य लौटा.

अपना अस्पताल शुरू करने से पहले डॉक्टर वर्मा थोड़े समय के लिए एक सरकारी अस्पताल के लिए भी काम किया था.

43 साल के डॉक्टर वर्मा कहते हैं, "दिल्ली में भारत के एक बहुत बड़े प्राइवेट अस्पताल में काम करने के दौरान मैंने देखा कि बिहार से आने वाले मरीज दाखिले के लिए कई दिनों तक इंतजार करते थे. उनके रिश्तेदार हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे."

सहूलियतें

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

डॉक्टर वर्मा ने बताया, "हम कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि अस्पताल में बिस्तर कम थे. मुझे ये ख्याल आया कि घर लौट कर हमें कुछ करने की जरूरत है."

उन्होंने एक पुराने स्कूल की इमारत को खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लिया और 3600 वर्ग फीट की इस जगह पर उन्होंने 12 बिस्तरों वाला एक अस्पताल पिछले साल शुरू किया.

इससे शुरू करते वक्त तमाम बारीकियों का ख्याल रखा गया था, जैसे हवादार कमरे, इमारत को ठंडा रखने का इंतजाम, बड़ी जगह वाला कंसल्टेशन रूम, साफ सुथरा ऑपरेशन थिएटर, बिजली की फायरप्रूफ़ वायरिंग, एक दवा की दुकान.

देखने की फीस

आस्था अस्पताल, डॉक्टर अतुल वर्मा, डॉक्टर जयश्री शेखर

इमेज स्रोत, British Broadcasting Corporation

अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में हर रोज मरीजों को देखा जाता है. मरीजों को देखने की फीस 200 रुपए है और उनके ऑपरेशन का खर्च 8000 से 12000 रुपए तक लिया जाता है जो इसी शहर के दूसरे प्राइवेट अस्पतालों से कहीं कम है.

थोड़े शब्दों में कहें तो आस्था अस्पताल के मरीज़ों में दो घंटे पहले बिना मलाशय के जन्मा एक नवजात बच्चे से लेकर प्रोस्टेट सर्जरी के लिए व्हीलचेयर पर आई 108 साल की एक महिला भी है.

इस अस्पताल में ये जोड़ा रोज सैंकड़ों मरीजो को देखता है. वे गांधी सेतु के कुख्यात ट्रैफिक से गुजरकर रोज यहां पटना से आते हैं.

चुनौतियों का पहाड़

बिहार, स्वास्थ्य सेवाएं

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं पर कई बार गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

उनके सामने बिजली और पानी जैसी तमाम मुश्किलें हैं. लेकिन वे पीछे हटने की बात नहीं सोचते.

डॉक्टर वर्मा कहते हैं, "कभी कभी जब बहुत थका होता हूं तो लगता है मरीजों को नहीं देख पाऊँगा."

उनकी योजना अस्पताल की एक और मंजिल बनाने की है, जहां जयश्री अपने मरीजों को देख सकेंगी.

उन्होंने सरकार से गरीब लोगों के लिए 100 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए जमीन मांगी है जिसकी मंजूरी के लिए वे तीन सालों से इंतजार कर रहे हैं.

बकौल डॉक्टर वर्मा, "हम हारे नहीं है, अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है."

(साथ में बीबीसी संवाददाता रूपा झा के इनपुट्स)

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>