मयंक गांधी ने 'आप' पर साधा निशाना

अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री दिल्ली (फ़ाइल)

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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मयंक गांधी ने गुरुवार को सार्वजनिक तौर पर योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है.

मयंक गाँधी ने अपने ब्लॉग में कहा है, ''मैं स्तब्ध रह गया जब पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने यादव और भूषण को राजनीतिक मामलों की समिति से हटा दिया.''

योगेंद्र यादव ने गांधी के ब्लॉग पर टिप्पणी करने से इनकार दिया और कहा कि वह हमेशा पार्टी के एक कर्मठ कार्यकर्ता रहेंगे.

पाबंदी को किया दरकिनार

अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री दिल्ली (फ़ाइल)

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मयंक गांधी महाराष्ट्र से 'आप' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं. उनका कहना है कि पार्टी की ओर से रोक के बावजूद वो इस बारे में जानकारी को सार्वजनिक कर रहे हैं.

उन्होने लिखा है कि ''कल रात मुझसे कहा गया कि अगर मैंने कोई भी बात सार्वजनिक की तो मेरे ख़िलाफ़ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. मैं इस आदेश को नहीं मानता."

वो लिखते हैं, "मैं न तो बग़ावत कर रहा हूं न ही मैं पब्लिसिटी के लिए ऐसा कह रहा हूं. मैं प्रेस के पास भी नहीं जाऊंगा, हो सकता है मुझे इसके कुछ खुले या दबे नतीजे भुगतने पड़े. चाहे जो हो, मेरी निष्ठा पहले सत्य के लिए है.''

केजरीवाल ने मनवाई अपनी बात

गांधी ने ये भी लिखा है कि अरविंद केजरीवाल ने 26 फ़रवरी को उनसे कहा था कि अगर ये दोनों नेता 'आप' की राजनीतिक मामलों की समिति से रहेंगे, तो वह पार्टी प्रमुख नहीं रहेंगे.

गांधी लिखते हैं कि ''राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में योगेंद्र यादव ने कहा था कि वो ये बात समझते हैं कि अरविंद उन्हें पीएसी में नहीं चाहते, उनके लिए साथ काम करना मुश्किल होता जा रहा है. इसलिए वो और प्रशांत पीएसी से बाहर रहकर ख़ुश हैं, लेकिन उन्हें अलग-थलग नहीं किया जाए.''

प्रशांत भूषण, नेता आप (फ़ाइल)

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गाँधी के अनुसार यादव ने दो तरीक़े सुझाए थे. पहला, पीएसी का फिर से गठन किया जाना चाहिए जिसमें यादव और भूषण हिस्सा नहीं लेगें. दूसरा, पीएसी में कोई बदलाव न हो और बस वो दोनों बैठक में हिस्सा ना लें.

भूषण ने दी थी धमकी

गांधी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि ''मनीष सिसोदिया ने प्रस्ताव रखा कि यादव और भूषण को पीएसी से हटाया जाए और संजय सिंह ने इसका समर्थन किया.''

इस ब्लॉग पोस्ट में ये भी लिखा गया है कि ''दिल्ली विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान प्रशांत ने कई बार उम्मीदवारों के चयन पर पार्टी के ख़िलाफ़ प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने की धमकी दी थी. हममें से कई लोग इसे चुनाव तक किसी तरह रोक पाने में समर्थ रहे.''

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