किसानों का ध्यान रखेगी सरकार: मोदी

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बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब में मोदी ने बजट सत्र का पहला भाषण दिया. भाषण के दौरान उन्होंने भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष से बात करने पर सहमति जताई.
मोदी ने ज़्यादातर भाजपा के उस एजेंडे की बात की, जिस पर भाजपा ने चुनाव जीता था.
कांग्रेस पर निशाना
स्वच्छता, जनधन, भ्रष्टाचार और काले धन की वापसी के साथ उन्होंने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की बात की. प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और यूपीए सरकार की आलोचना भी की.

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मोदी ने कहा, ''भूमि अधिग्रहण क़ानून में अगर कोई कमी थी, तो यूपीए सरकार को उस पर बात करने में क़रीब 200 साल क्यों लगे.''
उनका कहना था, ''क्या यह हमारी ज़िम्मेदारी नहीं कि हम ग़लतियां सुधारें. (बिल में) बदलाव के लिए मैं आपका सहयोग चाहता हूं. अगर आपको लगता है कि इसमें कुछ किसानों के ख़िलाफ़ है, तो मैं भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव लाने को तैयार हूं.''
मोदी ने ज़ोर दिया कि इस बिल पर किसानों और आदिवासियों की आपत्तियों के बारे में बात की जाएगी.
उन्होंने कहा, ''जब हमने सरकार बनाई तो सभी दलों के मुख्यमंत्रियों ने कहा था- किसानों के बारे में सोचें. हम इतने अहंकारी नहीं हैं कि मुख्यमंत्रियों की बात न सुनें.''
'इंडिया फर्स्ट'
उन्होंने एकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत सरकार का केवल एक ही धर्म है- 'इंडिया फ़र्स्ट'.
किसानों के शक को दूर करने के लिए मोदी ने ज़ोर दिया कि सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है. किसान हित में ही सब कुछ होगा और अगर यह बिल बना तो विपक्ष को ही क्रेडिट मिलेगा.
उन्होंने विपक्ष को नीति निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए कहा कि उनकी सरकार के काम करने की एक ही शैली है- सबका साथ सबका विकास.
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