क्यों फंस गई है मोदी सरकार?

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बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को भी हंगामेदार रही. परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस नए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को ग़रीबों का हिमायती बताते हुए कहा कि इसके बाद किसानों को क़रीब 2000 करोड़ का मुआवज़ा दिया जा चुका है.

सभी विपक्षी दलों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध किया.

गडकरी ने मीडिया को बताया कि अनुसूची-चार में 13 क़ानून भूमि अधिनियम से मुक्त होंगे और यह अध्यादेश मुआवज़े और पुनर्वास पर कोई समझौता नहीं करेगा.

मोदी अडिग

विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यादेश पारित करवाने पर दृढ़ दिखाई दिए. उन्होंने अपने सांसदों को निर्देश दिए हैं कि वे जनता के पास जाएं और इस बारे में लोगों को आश्वस्त करें.

मोदी ने अपने सांसदों से कहा कि वे विपक्ष के आरोपों से विचलित न हों.

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अगर यह बिल इस सत्र में पारित नहीं होता तो यह अध्यादेश रद्द हो जाएगा और इसे दोबारा पेश नहीं किया जा सकेगा.

यूपीए सरकार के कार्यकाल में क़ानून बने भूमि अधिग्रहण क़ानून 2013 में मोदी सरकार ने कुछ अहम बदलाव किए हैं. इस संशोधित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का किसान संगठन पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं.

विरोध जारी

विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जंतर मंतर और संसद मार्ग पर जारी रहा.

भूमि अधिकार एकता परिषद के कुछ किसान पलवल से इस आंदोलन का समर्थन करने आए थे. अन्ना हज़ारे और गोविंदाचार्य ने किसानों के विशाल हुजूम को संबोधित किया.

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ये सैकड़ों किसान और आदिवासी लोकगीतों के ज़रिए ज़मीन से जुड़े मुद्दों और अपने कष्टों को बयान कर रहे थे.

किसानों का मानना है कि अगर इस मुद्दे पर समझौता न हुआ, तो यह आंदोलन देशभर में और सघन हो जाएगा.

प्रदर्शन में कांग्रेस भी

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कांग्रेस ने भी जंतर मंतर पर किसानों के समर्थन में 'ज़मीन वापसी' आंदोलन किया.

इस मंच पर जयराम रमेश और दीपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे पर कार्यकर्ता और किसान इतनी तादाद में नज़र नहीं आए.

बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने बताया कि जंतर मंतर पर कांग्रेस की रैली फ्लॉप शो ही रही.

हालांकि दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अगर यह अध्यादेश वापिस नहीं लिया जाता, तो हरियाणा के किसान राजधानी को घेर लेंगे और चक्का जाम करेंगे.

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