एफ़डीआईः बीमा क्षेत्र खोलना आसान नहीं

इमेज स्रोत, AFP
- Author, गोकुल चौधरी
- पदनाम, बीएमआर एंड एसोसिएट्स एलएलपी
जब से मोदी सरकार ने सत्ता संभाली है सात अहम प्रेस नोट आ चुके हैं.
इनमें तीन रक्षा क्षेत्र, रेलवे, फॉर्मासूटिकल्स और रियल एस्टेट को विदेशी निवेश के लिए खोलने के बारे में हैं.
मगर सरकार ने जिस बड़े सुधार पर अपनी साख दांव पर लगाई है, वह है बीमा क्षेत्र में एफ़डीआई को 26 फ़ीसदी से बढ़ाकर 49 फ़ीसदी करना.
यह ऐसा कदम है जिसके लिए संसदीय संशोधन लाना पड़ेगा क्योंकि संसद पहले ही एफ़डीआई की सीमा तय कर चुकी है.

एफ़डीआई पर फ़ैसलों को हक़ीक़त में बदलने वाले दस्तावेज़ को लिखा था वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति और विकास विभाग ने, पर असल में वह एक क्लर्क की भूमिका में था क्योंकि फ़ैसला मुख्यतः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किया था.
सुधार का दौर
इसमें संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में तो पारित हो गया पर विपक्षी दलों के विरोध के चलते और राज्यसभा के गणित के चलते यह ऊपरी सदन में अटक गया.

इमेज स्रोत, makeininda.com
इसके बाद सरकार ने अध्यादेश का सहारा लिया लेकिन इसे वर्तमान संसदीय सत्र में पारित करवाना ज़रूरी है.
इसलिए इस सत्र में या तो राजनीतिक मतैक्य होगा या फिर सरकार को दूसरे संवैधानिक उपायों का सहारा लेना होगा क्योंकि वह सुधार के मामलों में मुँह की नहीं खाना चाहती.
रेलवे की चुनिंदा गतिविधियों- आधारभूत ढांचे और सहायक कार्यों के साथ ही रक्षा क्षेत्र में एफ़डीआई की संभावनाएं खोलकर सरकार अपने प्रचारित कार्यक्रम पूंजी निवेश बढ़ाने, रेलवे के आधारभूत ढांचे में कौशल निखारने और 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के ज़रिए रक्षा उपकरण निर्माण में नौकरियां पैदा करने की ओर आगे बढ़ रही है.
भूल सुधार
मेडिकल उपकरणों को फ़ार्मास्यूटिकल्स की श्रेणी से बाहर करने से यह क्षेत्र खुद ही एफ़डीआई की अनुमति वाले क्षेत्रों में आ जाता है और इस दिशा में कोशिशें पिछले कुछ समय से जारी थीं.

पहले यूपीए सरकार के समय हुई ग़लती भी दुरुस्त हो जाएगी जिसने भारतीय फ़ार्मा कंपनियों के अधिग्रहण से घबराकर यह शर्त लगा दी थी कि फ़ार्मास्यूटिकल्स उपक्रमों के अधिग्रहण के लिए सरकार की इजाज़त ज़रूरी होगी.
सरकार के पुरानी चर्चा के दस्तावेज़ जारी करने से बढ़ी हुई मीडिया कवरेज और उम्मीदों के अलावा ई-कॉमर्स खुदरा व्यापार को आसान बनाने के लिए कुछ नज़र नहीं आया.
ऐसी उम्मीद थी कि कम से कम ई-कॉमर्स के लिए बाज़ार आधारित मॉडल तक एफ़डीआई आने दिया जाएगा क्योंकि ई-कॉमर्स और खुदरा बाज़ार रोज़गार पैदा कर सकते हैं और लॉजिस्टिक्स उद्योग का विकास हो सकता है.
अब सभी की आंखें वित्तमंत्री पर लगी हैं कि वह 28 फ़रवरी को इन सुधारों का ऐलान करें.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












