भागवत का 'भाषण' क्या 'घृणा प्रचार' नहीं?

मोहन भागवत

इमेज स्रोत, PTI

    • Author, अपूर्वानंद
    • पदनाम, विश्लेषक, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

मोहन भागवत ने मदर टेरेसा की सेवा के <link type="page"><caption> मक़सद के बारे में जो कहा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2015/02/150223_rss_chief_slams_mother_teresa_pm.shtml" platform="highweb"/></link>, वह घृणा प्रचार की श्रेणी में है या नहीं? या अब हम इस पर बहस शुरू करेंगे कि मदर ने पूरे जीवन में कितने लोगों के धर्म परिवर्तन में प्रत्यक्ष या परोक्ष मदद की होगी?

कि उनकी सेवा सिर्फ़ दिखावा थी, असल मक़सद भारतीयों को ईसाई बनाना था? चूँकि उनकी सेवा का मक़सद धर्म परिवर्तन था, उसे ज़बर्दस्ती या प्रलोभन माना जाना चाहिए?

कि वे भारत और हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ एक अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत यहां भेजी गई थीं?

पढ़ें विस्तार से

मदर टेरेसा

इमेज स्रोत, AP

या हम यह कहकर तसल्ली कर लेंगे कि यह तो किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति का बयान नहीं है, किसी का दिमाग़ी ख़लल भर है और उस पर ख़ुद बहुत मगजपच्ची की ज़रूरत नहीं?

लेकिन यह कोई मामूली आदमी नहीं. उन्हें अंग्रेज़ी का ‘फ्रिंज एलिमेंट’ कहने पर मानहानि का मुक़दमा हो सकता है.

<link type="page"><caption> (पढ़ेंः भागवत के भाषण पर विवाद, लेकिन मोदी ख़ुश)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/10/141003_modi_rss_controversy_skj.shtml" platform="highweb"/></link>

आख़िर यह व्यक्ति ख़ुद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रमुख है और प्रधानमंत्री समेत इस सरकार के तक़रीबन सभी मंत्री इस संघ के स्वयंसेवक हैं.

और जैसा इस संघ के एक और स्वयंसेवक प्रधानमंत्री ने कुछ साल पहले कहा था कि कुछ भी हो, वे पहले स्वयंसेवक ही हैं. इससे इस व्यक्ति के रुतबे और इस सरकार पर उनके असर के बारे में अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

'पहले संविधान या संघ'

मोहन भागवत

इमेज स्रोत, Sanjiv Chandan

फिर संविधान के प्रति निष्ठा और हेग घोषणा से प्रतिबद्धता पहले या संघ प्रमुख से.

मोहन भागवत का बयान क्या फिर उसी पुराने स्वयंसेवक प्रधानमंत्री की मांग का अगला क़दम है- यानी धर्म परिवर्तन पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए?

शायद हमें याद आ जाए कि यह बयान उन्होंने तब दिया था जब ओडिशा में लंबे समय से कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रहे ग्राहम स्टेंस को उनके दो बच्चों के साथ सोते हुए जला दिया गया था.

तब उस प्रधानमंत्री ने यह कहना ज़्यादा ज़रूरी समझा था कि धर्म परिवर्तन पर बहस की जाए. उस प्रधानमंत्री को सबने उदारचेता घोषित कर दिया था.

नफ़रत की राजनीति

अलट बिहारी वाजपेयी

इमेज स्रोत, AFP

एक बड़े पत्रकार और इतिहासकार ने तो उन्हें 'भगवा नेहरू' की उपाधि दे डाली थी!

उन पर सांप्रदायिकता का आरोप लगते ही वे हैरान हो जाते थे और लगभग रो पड़ते थे कि आखिर उन जैसे महान पुरुष को कोई सांप्रदायिक कह ही कैसे सकता था?

तब भी नहीं जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को राजधर्म की याद दिलाने के फ़ौरन बाद वे पूछ बैठे थे, "लेकिन इस पर भी बात हो कि आग पहले किसने लगाई थी?"

अभी एक राज-वक्तव्य आ गया है और मान लिया गया है कि अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक, हर किसी को अपना धर्म पालन करने की आज़ादी है और किसी को किसी के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

इस सरकार के मुखिया की दृढ़ता के सब कायल हैं.

सरकार क्या करेगी

नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, EPA

तो बयान की जांच का पहला मौक़ा आ गया है. सरकार अपने पितृ संगठन के प्रमुख के ख़िलाफ़ कोई क़ानूनी कार्रवाई शुरू करेगी या नहीं? क्या उनके बयान की वह भर्त्सना करेगी?

यह तो नहीं ही कह सकेगी कि सरकार का काम हर ऐरे-गैरे के बयान पर प्रतिक्रिया देना नहीं है? या जैसा उसके एक मंत्री ने कहा कि सरकार किसी प्राइवेट व्यक्ति के बयान पर कुछ नहीं बोलती.

क्या यह आरामदेह श्रम विभाजन है? संघ देश में संदेह और विभाजन का काम करेगी और सरकार एकता स्थापित करेगी?

बहुधार्मिक समाज के प्रबंधन का ज़िम्मा लेने वाली सरकार कैसे काम करती है, इसका उदाहरण हाल ही में इंग्लैंड की एक घटना से मिलता है.

इंग्लैंड का उदाहरण

एनआरई, लंदन

20 फ़रवरी को अख़बारों में रिपोर्ट आई कि इंग्लैंड पुलिस ने जब हिंदू स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में एक वक्ता की ओर से इस्लाम और दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक वक्तव्य का वीडियो सामने आया, तो उनके खिलाफ जांच शुरू की गई.

सरकार अगर यह कहे कि वह देश में धार्मिक सद्भाव कायम रखने के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी, तो इससे कम कार्रवाई से काम नहीं चलता.

लेकिन भागवत महोदय एक के बाद एक ऐसे बयान देते जा रहे हैं. अगर उन पर मुसलमान या ईसाई क्षुब्ध हों, तो उन्हीं पर असहिष्णुता का इल्ज़ाम लग सकता है.

मोहन भागवत

इमेज स्रोत, AFP

मेरा कोई इरादा मदर के काम की महिमा का गान का नहीं है.

वैसा करके मैं ख़ुद को ही थोड़ा बड़ा कर लूंगा क्योंकि जो मदर ने किया वह न कर पाने में अपनी अपर्याप्तता का ख्याल है मुझे.

सरकार कुछ करे न करे, हिंदुस्तानी कृतघ्न साबित होंगे अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस बयान पर उन्होंने एक बार भी सामूहिक रूप से निंदा नहीं की.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>