भाजपा का 'बम' और केजरीवाल का 'हथगोला'

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली की चुनावी लड़ाई में विज्ञापनों के ज़रिए जो बमबारी हो रही है उसमें आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल बाज़ी मारते दिख रहे हैं.
भाजपा का निशाना केजरीवाल पर होता है, लेकिन केजरीवाल बम को वापस हथगोले की तरह फेंकते हैं, गोत्र वाले मामले में भी केजरीवाल ने यही किया, उन्होंने भाजपा पर ऐसी चोट की, कि पार्टी तिलमिला उठी.
भाजपा के ताज़ा विज्ञापन में केजरीवाल के बारे में कार्टून बनाकर जो कुछ लिखा गया था उसमें एक वाक्य ये भी था, "देश के करोड़ों लोग गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व मानते हैं, इस पर गर्व करते हैं और आपका उपद्रवी गोत्र इसमें भी व्यवधान डालने को तैयार था..."
चांस पर डांस

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सच जो भी हो, ‘उपद्रवी गोत्र’ का इस्तेमाल बहुत सारे लोगों को आपत्तिजनक लगा होगा, इसके बाद केजरीवाल ने वही किया जिसमें वे माहिर हैं, 'चांस पर डांस' करने का मौक़ा वे नहीं चूके.
उन्होंने इस विज्ञापन को अपने 'अग्रवाल गोत्र' यानी पूरे बनिया समाज का अपमान क़रार दिया.
दिल्ली में बनिया समाज काफ़ी बड़ा है और परंपरागत रूप से उसे भाजपा समर्थक माना जाता है, यही वजह थी कि भाजपा ने तुरंत अपने एक ऐसे मंत्री को बचाव के लिए उतारा जो बनिया समुदाय से आते हैं.
'पक्का बनिया'

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केजरीवाल शायद जानते होंगे कि एक ही जाति में कई गोत्र हो सकते हैं और एक गोत्र के लोग अनेक जातियों में पाए जाते हैं.
जानकार ये भी कहते हैं कि अग्रवाल कोई गोत्र नहीं है, बल्कि ख़ुद को महाराजा अग्रसेन से जुड़ा मानने वाले लोगों का समुदाय है जिसके भीतर बंसल, कंसल, जिंदल और सिंघल जैसे गोत्र शामिल हैं.
केजरीवाल बनिया समुदाय को अपनी जाति याद दिलाने के लिए कई बार ख़ुद को बातों-बातों में 'पक्का बनिया' बता चुके हैं.
भाजपा की तरफ़ से पीयूष गोयल ने विज्ञापन पर सफ़ाई पेश करते हुए कहा कि असल में विज्ञापन में केजरीवाल के गोत्र को नहीं, बल्कि उनके डीएनए यानी उनके नेचर के बारे में कहा गया है कि वे उपद्रवी हैं. गोयल की सफ़ाई है कि विज्ञापन में शायद अंग्रेज़ी का शाब्दिक अनुवाद कर दिया गया है.
केजरीवाल की फ़रियाद

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मफ़लर लपेटकर केजरीवाल ने एक चोट खाए मासूम आदमी की तरह फ़रियाद की, "पिछली बार इन्होंने मेरे बच्चों को निशाना बनाया था, इस बार तो इन्होंने हद कर दी, मेरे पूरे अग्रवाल गोत्र को उपद्रवी बता रहे हैं."
भाजपा नेता अरूण जेटली के कहने पर केजरीवाल के बच्चों वाला विज्ञापन हटा दिया गया था.
केजरीवाल की इस नाराज़गी में बनिया समाज की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश दिखाई देती है.
गोयल कहते हैं कि केजरीवाल का काम है, पत्थर फेंकना और भाग जाना, लेकिन दरअसल वो भागते नहीं हैं. पत्थर से चोट लगने का इज़हार खूब करना जानते हैं जिससे भाजपा को सफाई जारी करनी पड़ती है.
आप कहती है वो जातिवाद की सियासत नहीं करती, अगर केजरीवाल करना भी चाहें तो इसका बनिया समाज पर शायद ही असर हो. दिल्ली में जातिवादी चुनावी मुद्दे अब तक असरदार नहीं रहे हैं.
ये ज़रूर है कि केजरीवाल पर व्यक्तिगत हमले भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं और इसका जितना फ़ायदा केजरीवाल उठा सकते हैं वो ज़रूर उठाएँगे.
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