भारत व अमरीकी अर्थव्यवस्था का ही बेहतर भविष्य

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- Author, गुरचरण दास
- पदनाम, आर्थिक मामलों के जानकार
अंग्रेजी में कहते हैं, द बिज़नेस ऑफ़ अमरीका इज़ बिज़नेस.
इसका मतलब है, अमरीका का कारोबार ही कारोबार है.
हम सब अमरीका से व्यापार के बारे में सीख सकते हैं. अपने कारोबार के चलते ही महज 200 साल में अमरीका में इतनी अमीरी आ गई और दुनिया के बाकी देश मिडिल क्लास में बदल गए.
इस लिहाज से देखें तो, बराक ओबामा की भारत यात्रा को एक अवसर में बदलने की जरूरत है. भारत को इसे भुनाना चाहिए.
अमरीका हमेशा वर्ल्ड बैंक की रैंकिंग को तैयार करता है, टॉप देशों की, कारोबार के लिहाज से कि कहां व्यापार करना बेहतर है और मुश्किल है.
मोदी की चुनौती
इस रैंकिंग में भारत हमेशा बहुत नीचे रहता है. अगर मोदी साहब इस स्थिति में अगले पांच साल में भी बदलाव ला दें तो यह काफी बड़ी बात होगी.
इससे भारत में नौकरियां आ सकती हैं, भारत का ग्रोथ रेट बढ़ेगा.
इस समय भारत हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार देश है, तो अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इसे भुनाना चाहेंगे.
हालांकि मेरे ख्याल से भारत को अपने यहां हथियार बनाने पर जोर देना चाहिए. मोदी को इसे अवसर के तौर पर देखना होगा.

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भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं.
लेकिन हमें यह ध्यान देना होगा कि ये भारत का वक्त है.
अगर आप दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को देखें तो महज दो देशों की अर्थव्यवस्था का भविष्य बेहतर दिखता है.
एक तो भारत की अर्थव्यवस्था है और दूसरी है अमरीका की अर्थव्यवस्था.
अगले पांच साल में दुनिया के ग्रोथ में इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं का सबसे अहम योगदान रहेगा.
हमारे लिए ये जरूरी है कि हम अमरीका के साथ बेहतर संबंध बनाएं. हमने अमरीका की उपेक्षा की है और अमरीका ने हमारी उपेक्षा की है, तो हमें इसे ठीक करना होगा.
भारत का है भविष्य

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का ताजा अध्ययन भी ये बता रहा है कि 2016 में भारत का विकास दर चीन को पीछे छोड़ देगा. यानी चीनी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी हो रही है, दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है.
नरेंद्र मोदी तीन अहम वादों के चलते आम चुनाव में लोगों का समर्थन जीतने में कामयाब हुए थे, पहला महंगाई पर नियंत्रण, दूसरा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और तीसरी था नौकरी.
वे जब से प्रधानमंत्री बने हैं, तब से महंगाई पर नियंत्रण दिख रहा है. कोई बड़ा घोटाला भी सामने नहीं आया है तो भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है.

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लेकिन ग्रोथ के बिना नौकरी नहीं आएगी, और ग्रोथ में वक्त लग रहा है. लेकिन अमरीका के साथ कारोबारी रिश्ते बढ़ाकर हम इसे रफ़्तार दे सकते हैं.
(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)
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