अब भाजपा अकाली गठबंधन टूटने की बारी!

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    • Author, दलजीत अमी
    • पदनाम, पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

पंजाब में अकाली दल और भाजपा के 18 साल पुराने गठबंधन में अब दरारें दिखने लगी हैं.

आठ साल पुराने गठबंधन वाली सरकार में हालात बदलते लग रहे हैं.

अभी तक अकाली-भाजपा गठबंधन बादल-अडवाणी रिश्तों पर टिका हुआ था. एक तो लालकृष्ण आडवाणी की भाजपा में भूमिका पहले सी नहीं रही. दूसरी नरेंद्र मोदी का चुनावी असर पूरे देश में बढ़ता ही गया.

पंजाब में ड्रग्स को लेकर दोनों पार्टियों के बीच चल रही बयानबाज़ी से इनके बीच बढ़ते मतभेद का पता चलता है. भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने ड्रग्स के मुद्दे पर अपनी-अपनी मुहिम शुरू कर रखी है.

पिछले दिनों अकाली दल ने पाकिस्तान की सरहद के साथ लगने वाले ज़िलों में सीमा सुरक्षा बल के ख़िलाफ़ रैलियां की.

भाजपा शासित राज्यों पर आरोप

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अकाली दल के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा का कहना हैं, "सबसे ज़्यादा ड्रग्स की तस्करी पाकिस्तान की तरफ़ से होती है. इसे रोकने की ज़िम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल की है. हम चाहते हैं कि सरहद को सील किया जाए और पंजाब को इस प्रकोप से बचाया जाए."

अकाली दल की यह भी दलील है कि पंजाब में राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी ड्रग्स आने बंद होने चाहिए. राजस्थान और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है तथा सीमा सुरक्षा बल केंद्र सरकार के अधीन है.

भाजपा भी इस मुद्दे पर लगातार बयान देकर अकाली दल को शर्मिंदा करने में लगी रहती है.

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सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल के एक मंत्री स्वर्ण सिंह फिल्लौर को हाल में इसलिए इस्तीफ़ा देना पड़ा क्योंकि उनके बेटे दमनवीर सिंह फिल्लौर का नाम तस्करी के चलते सामने आया था. एक भूतपूर्व पुलिस अफसर और अंतर्राष्ट्रीय पहलवान जगदीश सिंह भोला ने पुलिस पूछताछ के दौरान दमनवीर सिंह का नाम लिया था.

बादल के रिश्तेदार लपेटे में

पुलिस अधिकारियों के अनुसार भोला ने पंजाब के राजस्व मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया का नाम भी लिया है जो मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के रिश्तेदार हैं. भाजपा के प्रवक्ता सत्यपाल जैन का कहना है, "किसी को इस कारण नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि वह मंत्री है."

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उधर कांग्रेस के प्रवक्ता सुखपाल सिंह खहरा कहते हैं, "अकाली दल ने ड्रग तस्करी को प्रोत्साहन दिया है. यह दूसरे देशों से आ रहे नशे की बात करते हैं पर राज्य में चल रहे सिंथेटिक ड्रग के बारे में ख़ामोश हैं."

हर पार्टी इस मामले में चुनिंदा पक्ष लेकर राजनीति कर रही है.

भाजपा और अकाली दल पर एक दूसरे पर इशारों ही इशारों में इल्ज़ाम लगा रहे हैं पर जब गठबंधन की सेहत का सवाल आता है तो भाजपा और अकाली दल एक ही बात करते हैं कि "यह गठबंधन पहले की तरह मज़बूत है और हम इसको चलाना चाहते हैं. बाक़ी हर किसी को अपना फ़ैसला करने का अधिकार है."

केवल यही बात है जहाँ दोनों का सुर मिलते हैं बाकी जगहों पर तो दोनों दल एक दूसरे को काटते दिखते हैं.

बिगड़ते सुर

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पिछले साल लोक सभा में पहली बार चुनाव लड़ने वाले जेटली पंजाब से बुरी तरह हारे थे. उसके बाद से ही पंजाब सरकार पर भ्रष्टाचार और ड्रग्स के मुद्दे उठने लगे.

केंद्र से लेकर देश के अलग अलग राज्यों में जीत के बाद चर्चा है कि भाजपा पंजाब में भी अकेले चुनाव लड़ सकती है.

पंजाब में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं तथा अपने प्रभाव शहरों से गांव और गैर-हिन्दू लोगों में पहुंचाने में जुट गए हैं.

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