आदिवासियों को जनपत्रकारिता से जोड़ने की कोशिश

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    • Author, पुरुषोत्तम ठाकुर
    • पदनाम, अबूझमाड़ से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय के बीच काम करने वाली संस्था सीजीनेट स्वरा ने एक जनवरी से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से जनपत्रकारिता जागरूकता यात्रा शुरू की है.

इस यात्रा का उद्देशय सीजीनेट स्वरा की जन पत्रकारिता के बारे में नुक्कड़ नाटकों और नाट्य प्रस्तुतियों के ज़रिए जागरूकता फैलाना है.

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इस यात्रा के दौरान मध्यभारत के छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश की जाएगी.

सीजीनेट स्वरा ने इसके लिए दो टीमें बनाई है. एक हिंदी की टीम है और दूसरी गोंडी भाषा की टीम.

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STYतो ऐसे बच पाएगी गोंडी भाषा ?मध्य भारत की गोंडी भाषा को बचाने की पहलपूर्व और मध्य भारत में बोली जाने वाली गोंडी भाषा को चलन से ग़ायब होने से बचाने के लिए क्या कोशिशें हो रही हैं, पढ़िए.2014-07-24T17:12:21+05:302014-07-27T19:35:22+05:302014-07-27T19:35:22+05:302014-07-28T12:15:43+05:30PUBLISHEDhitopcat2 की टीम में सात लड़कियां शामिल हैं, जिनमें चार अबूझमाड़ ज़िले की हैं जबकि तीन कांकेर ज़िले की.

अबूझमाड़ गर्ल्स बैंड के नाम से धीरे-धीरे मशहूर हो रही टीम इन दिनों बस्तर का यात्रा कर रही है.

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टीम का पहला पड़ाव उत्तर बस्तर के कांकेर ज़िले के साप्ताहिक बाज़ार हाटकोन्दल था.

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इसके बाद यात्रा के दूसरे पड़ाव में बोगर गांव में आदिवासियों के कोलांग महोत्सव में गोंडी भाषा इन लड़कियों ने शानदार प्रस्तुति देकर जनपत्रकारिता के अपने संदेश को 110 गांव से आए गोंड आदिवासियों के प्रतिनिधियों तक पहुंचाया.

इसके बाद टीम अबूझमाड़ के इलाक़े में पहुंची. सात जनवरी को इन लड़कियों ने अबूझमाड़ के साप्ताहिक बाज़ार ओरछा हाट में प्रस्तुति की.

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ओरछा हाट क़रीब चार हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के दायरे में व्याप्त इकलौता हाट है.

स्थानीय गोंड आदिवासी समुदाय के लोगों ने जब अपनी बोली में नाट्य प्रस्तुतियों को सुना तो बाज़ार छोड़कर सैकड़ों लोग नाट्य मंचन के इर्द गिर्द एकत्रित हो गए.

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प्रस्तुति के बाद इन लड़कियों ने अबूझमाड़ के अंदरूनी इलाक़े से आए आम लोगों से बात की और उन्हें सीजीनेट स्वर के बारे में बताया.

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गोंडी भाषा के चलते आदिवासी सीजीनेट स्वरा और उसके उपयोग की तरीक़ों को सहजता से सीख पाए.

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सीजीनेट स्वरा की टीम ने गोंड आदिवासी लोगों की मुश्किलों और उनकी संस्कृति के बारे में भी जानकारी हासिल की और जन-पत्रकार के तौर पर सीजीनेट स्वरा में अपलोड कर देश दुनिया तक पहुंचाने का काम भी किया है.

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इस तरह से ही अबूझमाड़ की ये लड़कियां देश के गोंड आदिवासी इलाक़ों की यात्रा करेंगेी और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए मोबाइल फ़ोन के ज़रिए होने वाली सीजीनेट स्वरा की जनपत्रकारिता का संदेश आम आदिवासियों तक पहुंचाएंगे.

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