'स्वराज' का वादा है मुफ़्ती के गले की फांस?

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- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद सरकार बनाने को लेकर अनिश्चितता कायम है.
चुनाव में सबसे ज्यादा 28 सीटें हासिल करने वाली पीडीपी ने कहा है कि वो नैशनल कान्फ्रेंस, कांग्रेस के साथ एक बड़े गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है.
विधान सभा चुनाव में 87 सीटों में से पीडीपी को 28 और भाजपा को 25 सीटें मिली हैं. बहुमत के लिए 44 विधायकों का समर्थन ज़रूरी है.
बुधवार को पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती राज्यपाल एनएन वोहरा से मिलकर सरकार गठन पर चर्चा करेंगी.
लेकिन सरकार के गठन में हो रही देरी के असल कारण क्या हैं?
पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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भाजपा का प्रतिनिधिमंडल एक जनवरी को राज्यपाल से मिलेगा.
भाजपा ने राज्य में उसके बगैर राज्य की स्थानीय पार्टियों के गठबंधन का विरोध किया है.
सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने तो संकेत दिए वे भाजपा के साथ हाथ मिलाने के तैयार हैं.
लेकिन पार्टी अध्यक्षा महबूबा मुफ़्ती ने पार्टी नेताओं से इस मसले पर मीडिया में टिप्पणी करने से मना किया है.
महबूबा मुफ़्ती और उनके पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद की मुश्किल ये है कि उन्होंने राज्य के लोगों से 'स्वराज' का वादा कर रखा है.
'भाजपा को रोकने की बात'

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भाजपा कश्मीर को भारत के साथ 'एकीकृत' करना चाहती है. जब से चुनाव नतीजे आए हैं तब से भाजपा और दूसरों दलों के बीच कथित तौर पर गुप्त बातचीत के दौर चले हैं. लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ पाई है.
इस बीच कश्मीर में कुछ सिविल सोसायटी समूहों ने भाजपा सरकार की संभावना को घाटी के लिए खतरा बताया और मुफ़्ती मोहम्मद सईद के विरोध में प्रदर्शन किए हैं.
सिविल सोसायटी समूहों का कहना है कि कल तक मुफ़्ती मोहम्मद सईद भाजपा के कदमों को आगे बढ़ने से रोकने की बात कर रहे थे.

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एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "इस वक्त उस नारे को अमली जामा पहनाने का टाइम आ चुका है और उन्हें इस पर अमल करना चाहिए. कश्मीर के लोगों ने पीडीपी को भाजपा के खिलाफ वोट दिया है. हमारा साफ कहना है कि पीडीपी किसी कश्मीरी पार्टी के साथ गठबंधन करे लेकिन किसी भी कीमत पर भाजपा के साथ न जाए."
राज्य की मौजूदा विधान सभा की अवधि 18 जनवरी तक है लेकिन राज्पाल ने इस चुनाव में दो बड़ी पार्टियों के तौर पर उभरी पीडीपी और भाजपा से कहा था कि वे सरकार बनाने को लेकर अपनी नीति को स्पष्ट करें.
उमर लंदन में

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राज्य में नई सरकार के गठन की कवायदों के बीच राज्य के निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह लंदन चले गए हैं.
उनकी ग़ैर-मौजूदगी के कारण राज्य में अटकलों और अफवाहों का बाज़ार गर्म है.
साल 2002 में भी जब पीडीपी को 15 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं तो सरकार बनने की प्रक्रिया में 22 दिन की देरी हुई थी.
इसके कारण राज्य में एक महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.
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