असम: सेना अध्यक्ष की राजनाथ से मुलाकात

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असम में हुई हिंसा के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह और सेना अध्यक्ष से मुलाक़ात की है.
असम में ग़ैर-बोडो जनजातियों पर हुए हमले और जनजातियों के जवाबी हमले में अब तक 76 लोग मारे जा चुके हैं.
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया था. उन्होंने कहा, "सरकार आतंकवादी गुटों से बात नहीं करेगी. सिर्फ़ कदम उठाए जाएँगे. जल्द ही समयबद्ध कार्रवाई होगी."
गोहाटी से स्थानीय पत्रकार विनोद रंगानिया ने बताया, "अभी इलाकों में काफी तनाव है. बीती रात कम से कम चार जगहों पर साप्ताहिक बाज़ारों को आग लगा दी गई है. जब तक सुरक्षा बल सभी संवेदनशील इलाकों में नहीं पहुंच जाते तब तक लोग केवल राजनाथ सिंह के बयान से प्रभावित होकर अपने घर नहीं लौटेंगे."
उन्होंने ये भी कहा कि शिविरों में रह रहे लोगों को अभी घर वापसी में एक से दो सप्ताह लग सकते हैं.
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इन हमलों की जांच एनआईए से कराने की घोषणा की थी. अलग बोडोलैंड की मांग करने वाले एनडीएफ़बी विद्रोहियों ने मंगलवार को चरमपंथियों सोनितपुर और कोकराझार ज़िले में हमले किए थे और 52 आदिवासियों को मार दिया था.
पुलिस के मुताबिक आदिवासियों ने भी कुछ बोडो गांव पर जवाबी हमला किया जिसमें कुछ बोडो मारे गए.
कौन है एनडीएफ़बी

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में काफ़ी समय से अलग राज्य की मांग, अलग पहचान के मुद्दे और जातीय मुद्दों पर हिंसा भड़कती रही है.
इससे पहले भी बोडो चरमपंथी स्थानीय आदिवासियों और कुछ मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं.
ऐसे एक हमले में मई में कोकराझार और बक्सा ज़िलों में 32 लोगों को मार दिया गया था.
इसके अलावा बांसबाड़ी में हुई एक वारदात में 100 से ज़्यादा मुसलमान प्रवासी मारे गए थे.
बोडो लोगों की इस समय एक स्वायत्तशासी परिषद है जिसे बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट चलाती है लकिन प्रवासियों के वहाँ ज़मीन लेने पर लोगों में ख़ासा असंतोष है.
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