जनता के सवाल, 'साहब' के जवाब

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) से
भारत में नौकरशाही से राजनीति में आने वाले लोगों की एक लंबी सूची है.
झारखंड में भी यशवंत सिन्हा से लेकर विष्णु दयाल राम के बीच प्रशासनिक या पुलिस सेवा से राजनीति में आने वाले कई लोग बेहद प्रभावशाली हुए हैं.
इस बार के भी झारखंड विधानसभा चुनावों में भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के तीन अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं.
सलमान रावी की रिपोर्ट

कुछ ही देर में चाईबासा के इस चौक पर एक नुक्कड़ सभा होने वाली है.
प्रचार की गाड़ी से एक शख़्स लोगों से पास आने की अपील कर रहा है.
यह सभा सड़क पर हो रही है और इसमें जनता सवाल करेगी और 'साहब' जवाब देंगे.
राजनीतिक दंगल

मैं बात कर रहा रहा हूँ 1983 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ज्योति भ्रमर तुबिद की जिन्होंने नौकरी छोड़ राजनीति का रुख़ किया है.
वो कोल्हान की चाईबासा की सीट से भाजपा के टिकट पर अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ रहे हैं.
तुबिद भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के उन तीन अधिकारियों में से हैं जो झारखंड के राजनीतिक दंगल में कूद पड़े हैं.
तुबिद के अलावा इस मैदान में आईएएस अफ़सर विनोद किसपोट्टा ओर आईपीएस लक्ष्मण प्रसाद सिंह चुनावी मैदान में हैं.
स्वेच्छा से रिटायर्ड

इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस सेवा के ही अमिताभ चौधरी और सेवा से रिटायर हुए राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक विष्णु दयाल राम ने भी चुनाव लड़ा.
राम की पलामू से जीत हुई जबकि चौधरी हार गए थे. तुबिद ने भी स्वेच्छा से रिटायर्मेंट लिया और चुनाव लड़ने तैयार हुए.
प्रचार अभियान

कभी केवल निर्देश देने वाले साहब को प्रचार अभियान के दौरान एक युवक ने कहा, "आप भी नेताओं की तरह मत कीजिएगा तुबिद जी, जो एक बार चुनाव जीतते हैं और फिर पलटकर नहीं आते."
तुबिद ने दावा है कि बतौर नौकरशाह वो जहाँ जहाँ भी तैनात रहे, लोगों से इसी तरह मिलते रहे.
लक्ष्मण रेखा

तुबिद इत्तेफ़ाकन सिवाए अपने चुनाव क्षेत्र के झारखंड के लगभग सभी ज़िलों में तैनात रहे .
इस लिए उनका कहना है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए इसी इलाके को चुना. वैसे उनके पिता भी इसी इलाके से ही सक्रिय राजनीति में रहे. झारखंड की राजनीति में उनका कद काफी ऊंचा रहा था.
वो कहते हैं, "राजनीति में आने का एक यह भी कारण है. मुझे मालूम है कि एक बार जीतकर जाने के बाद फिर नेता जनता के बीच जाने से कतराते हैं."
नौकरशाह की छवि

राज्य की प्रशासनिक और पुलिस सेवा में कार्यरत उनके सहयोगी मानते हैं कि बतौर नौकरशाह तुबिद की छवि एक अच्छे अधिकारी की रही है.
मगर राजनीति में जो आया बदल गया. यह तो वक़्त ही बताएगा कि इसका रंग उनपर कितना चढ़ पाएगा.
तुबिद भी कहते हैं कि उन्होंने "सिर्फ बिल्ला बदला है, स्वभाव नहीं."
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