झारखंड में माओवादियों ने दी 'नोटा' की सलाह

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पलामू से
झारखंड में होने वाले विधानसभा के चुनाव के पहले चरण का प्रचार रविवार की शाम थम गया.
झारखंड में कुल पांच चरणों में चुनाव होने हैं. पहले चरण का मतदान 25 नवंबर को होगा.
झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटों में से पहले चरण में 13 सीटों पर मतदान होगा.
पहले चरण में आने वाली अधिकतर सीटें नक्सल प्रभावित इलाकों की हैं. यहां माओवादियों ने लोगों को 'इनमे से कोई नहीं' यानी नोटा के इस्तेमाल की सलाह दी है.
विधानसभा चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण सीटें गढ़वा, चतरा, लोहरदगा, डाल्टनगंज भवनाथपुर, पांकी, लातेहार, मनिका, गुमला, बिश्रामपुर, बिशुनपुर, हुस्सैनाबाद और छत्तरपुर हैं.
पहले चरण के प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पलामू और गुमला में चुनावी सभाओं को संबोधित किया.
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन इलाकों का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने भी इस इलाके में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया है.
दिग्गजों की टक्कर

झारखंड में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन लगभग सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने वोटरों को लुभाने की आखिरी दम तक कोशिश की.
13 सीटों के मतदान के लिए कुल 199 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें झारखंड की राजनीति के कई दिग्गज शामिल हैं.
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह एक बार फिर गढ़वा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यहाँ इनको टक्कर दे रहे हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा के मिथिलेश ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी के सत्येंद्र तिवारी.
तिवारी पहले झारखंड विकास मोर्चा के विधायक रहे हैं मगर इस बार उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और उन्हें टिकट भी मिल गया.
नक्सल प्रभावित इलाके

लातेहार में भाजपा ने बृजमोहन राम को दोबारा उतारा है और उनकी टक्कर झारखंड विकास मोर्चा के प्रकाश राम और राजद के विजयराम रविदास से है.
बृजमोहन पूर्व मंत्री रह चुके हैं और इसलिए इस बार का चुनाव उनके और उनके संगठन के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है.
डाल्टनगंज की सीट पर भी रोचक मुकाबला नज़र आ रहा है जहाँ मौजूदा सरकार में मंत्री रहे केएन त्रिपाठी को भाजपा के मनोज सिंह से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है.
झारखंड विकास मोर्चा के आलोक चौरसिया ने इस सीट पर मुकाबले को और संघर्षपूर्ण बना दिया है.
46 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात

'सूखा पलामू-भूखा पलामू' के नाम से कुख्यात इस इलाके में साल के बारहों महीने सूखे के हालात रहते हैं. पिछले कई सालों से यहाँ के लोग अलग-अलग दलों या गठबंधन की सरकारों पर विकास की उम्मीद लगाए बैठे थे. मगर उनके हाथ निराशा ही लगी.
पांकी के रहने वाले उमेश प्रसाद कहते हैं कि पूर्ण बहुमत नहीं होने की वजह से निर्दलीय विधायकों ने झारखंड के साथ जैसे चाहा वैसे खेला.
पलामू के लोगों को लगता है कि गठबंधन की सरकारों ने राज्य को नुकसान ही पहुंचाया है

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चूँकि पहले चरण में आने वाला इलाका नक्सल प्रभावित है इसलिए इन इलाकों में 46 हज़ार के आसपास सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.
कुछ अंदरूनी इलाकों में मतदानकर्मियों को भेजने के लिए हेलीकाप्टर की भी व्यवस्था की गई है.
जंगल से मिल रही ख़बरों की बात की जाए तो यह संकेत मिल रहे हैं कि माओवादी ग्रामीण अंचल में लोगों को 'इनमे से कोई नहीं' यानी नोटा के इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
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