भारतीयों को कम वेतन देने पर जुर्माना

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अमरीका के श्रम विभाग ने सिलिकॉन वैली की एक कंपनी को भारत के आठ कर्मचारियों को कम वेतन देने के आरोप में दंडित किया है.
कैलिफ़ोर्निया स्थित कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स फ़ॉर इमेजिंग ने कर्मचारियों को 1.21 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से वेतन दिया.
उन्होंने प्रति सप्ताह ओवरटाइम न मिलने के बावजूद 122 घंटे काम किया.
कंपनी का कहना है कि उसने ग़ैर इरादतन तरीक़े से न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम के क़ानून को नज़रअंदाज़ किया. उस समय कैलिफ़ोर्निया में न्यूनतम वेतन आठ डॉलर प्रति घंटा था.
'ख़ून चूसने वाले'
सिलिकॉन वैली में हज़ारों भारतीय काम करते हैं और उनमें से कई की अपनी स्टॉर्ट अप कंपनियां भी हैं.

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रिपोर्टों के मुताबिक़ अब इलेक्ट्रॉनिक्स फ़ॉर इमेजिंग को पिछले वेतन के रूप में क़रीब 43 हज़ार डॉलर और साथ ही जुर्माना भी चुकाना होगा.
आठ कर्मचारियों को एक विशेष प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए तब बुलाया गया था जब कंपनी ने अपना मुख्यालय फोस्टर सिटी से फ्रेमोंट स्थानांतरित किया था.
रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी ने भारतीय कर्मचारियों को रुपयों में वही वेतन देना जारी रखा, जो उन्हें बंगलुरु में मिलता था.
अमरीकी क़ानूनों के तहत विदेशी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और अधिकतम 40 घंटे प्रति सप्ताह काम लेना अनिवार्य है.
श्रम विभाग के सहायक ज़िला निदेशक माइकल ईस्टवुड ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "अब तक मैंने लॉस एंजेल्स में कामगारों का ख़ून चूसने वाले जितने भी कारखाने देखे हैं, यहां उनसे भी ख़राब स्थिति है."
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