भाजपा में जगह बनाते आरएसएस के 'अनजान चेहरे'

इमेज स्रोत, EPA
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
कुछ दिनों पहले तक कोई नहीं जानता था कि यह कौन लोग हैं. चाहे प्रादेशिक स्तर पर या फिर राष्ट्रीय स्तर पर.
लेकिन अचानक से इन लोगों ने तेजी से अपना मुकाम बनाया है.
बात हो रही है 'संघ परिवार' के उन चेहरों की जिन्हें अब महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ सौंपीं गई हैं.
कौन हैं ये नए चेहरे और उन पर क्यों किया जाने लगा है इतना ज़्यादा भरोसा. इन लोगों के सफ़र के बारे में बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी.
सलमान रावी की रिपोर्ट
इनमें से सबसे प्रमुख नाम है मुरलीधर राव का जिन्हें अमित शाह की टीम में महासचिव का दायित्व दिया गया है.
राव बहुत ही काम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. उनकी शुरुआत अविभाजित आंध्र प्रदेश के वारंगल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई और 1984 में वो हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र संघ के महासचिव बन गए. विश्वविद्यालय के प्रांगण में ही उन पर 1986 में कथित रूप से नक्सलियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया.

जैसे-जैसे संघ में उनका क़द बढ़ता चला गया उनकी ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ने लगीं और उन्हें पहले राजस्थान और फिर जम्मू कश्मीर का प्रभारी बनाया गया.
लेकिन उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तब अदा की जब स्वदेशी जागरण मंच का गठन हो रहा था. एस गुरुमूर्ति, मदन दास और दत्तोपंत ठेंगड़ी के साथ उन्होंने मंच का सांगठनिक ढांचा तैयार करने में काफ़ी मेहनत की.
हालांकि भारतीय जनता पार्टी में उनकी 'एंट्री' औपचारिक रूप से 2009 में ही हो गयी थी जब उन्हें राजनाथ सिंह का सहयोग करने का दायित्व दिया गया था.
फिर 2010 में नितिन गडकरी ने उन्हें संगठन में सचिव के तौर पर नियुक्त किया था. वर्ष 2011 के दिसंबर माह में बुनकरों के सवाल पर तीन दिनों की भूख हड़ताल ने संगठन में उनका क़द बढ़ा दिया.

इमेज स्रोत, AFP
बीबीसी के स्टूडियो आए मुरलीधर राव ने कहा, "संघ ने मुझे काफ़ी कुछ दिया है. उसूल और सिद्धांत क्या होते हैं यह संघ में आने के बाद ही पता चला. मेरा पूरा व्यक्तित्व ही बदल गया. संघ के बाद अब संगठन में मुझे ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है. यह भी मेरे लिए एक बड़ी चुनौती है."
जेपी आंदोलन से निकले रघुबर
रघुबर दास का सफर भी सड़क से ही शुरू हुआ जब 1974 में जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर वो छात्र संघर्ष समिति में शामिल हो गए.
इसके फ़ौरन बाद ही उन्होंने संघ का दामन थाम लिया और जल्द ही उन पर अविभाजित दक्षिण बिहार में संगठन को मज़बूत करने की ज़िम्मेदारी आ गयी.
बिहार से दक्षिणी हिस्से को काटकर अलग किया गया और झारखण्ड का जन्म होते ही रघुबर दास नए राज्य के बड़े राजनीतिक चेहरों में शुमार होने लगे.

कई सालों तक बिहार और झारखण्ड में संगठन के अंदर विभिन्न भूमिकाओं में काम करने के बाद यह पहला मौक़ा है जब अमित शाह की नई टीम में उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है. इससे पहले झारखण्ड से करिया मुंडा और अर्जुन मुंडा को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल चुके हैं.
हालांकि अर्जुन मुंडा का संघ से कोई लेना देना नहीं था क्योंकि वो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा से सीधे भाजपा में शामिल हुए थे, रघुबर दास संघ के लिए लम्बे समय तक काम करते रहे.
वो पूछते हैं, "मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को भी संगठन के शीर्ष पदों तक पहुँचने का मौक़ा मिला. क्या यह इस बात का सुबूत नहीं है कि हमारा संगठन ज़्यादा लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है?"
दिल्ली में संघ का मुस्लिम चेहरा
सैय्यद हसन इमाम ने पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार के इलाक़े में आरएसएस की पहली शाखा 1989 में लगानी शुरू की थी. यहीं से उन्होंने संघ का दामन थामा.
वो भी ऐसे में जब मुसलमानों का रुझान आरएसएस की तरफ़ बिल्कुल ही नहीं था. फिर बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि का विवाद शुरू हुआ मगर वो आरएसएस के साथ बने रहे.

"शुरू-शुरू में मुझे सुबह सुबह शाखा के लिए लोगों को उठाने का ज़िम्मा दिया गया. जल्द ही शाखा आयोजित करने की पूरी ज़िम्मेदारी मेरे ही कन्धों पर आ गयी. फिर समय गुज़रता गया और संघ में मुझे दूसरे महत्वपूर्ण दायित्व भी दिए जाने लगे."
इस बार अमित शाह की नयी टीम में हसन इमाम को भी रखा गया है. उन्हें भारतीय जनता पार्टी की मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की केंद्रीय परिषद का सदस्य बनाया गया है.
इस बार उनपर जम्मू कश्मीर में संगठन को मज़बूत करने और वहां पर कुछ ही महीनों के अंदर होने वाले विधान सभा चुनाव रणनीति बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












