भाजपा मनरेगा को कमज़ोर कर रही है: अरूणा

- Author, तुषार बनर्जी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार मिशन यानी मनरेगा को कमज़ोर करने की कोशिश का आरोप लगाया है.
उनका आरोप है कि नई सरकार ने ग़रीब ग्रामीण परिवारों को रोज़गार देने के लिए बनाए गए मनरेगा कानून में ऐसे कुछ बदलाव किए हैं जिससे कम से कम पांच करोड़ परिवारों को नुकसान होगा.
अरूणा रॉय ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “हम ये देख रहे हैं कि गरीबी नहीं हो इस प्रयास में सरकार गरीबों को ही खत्म कर देना चाहते हैं. सरकार मनरेगा के मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर उन लोगों को पीटना चाहते हैं जो बेचारे ग़रीब है और बेहतरी की आस में वोट देते हैं. मनरेगा इसलिए बना कि लोगों को हक मिल सके.”
नई दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में अरूणा रॉय और सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने आरटीआई से मिली जानकारी के मार्फत सरकार के तीन ऐसे क़दम गिनाए जिससे मनरेगा को कथित तौर पर नुकसान पहुंचेगा.
ये हैं वे तीन क़दम
पहला क़दम: मनरेगा में मज़दूरी बनाम सामान के भाग में बदलाव कर मज़दूरी के भाग को कम किया गया है. निखिल डे के अनुसार इससे बेनामी कॉन्ट्रैक्टरों को बढ़ावा मिलेगा.
दूसरा क़दम: मनरेगा के लिए पैसे का आवंटन किया जाएगा, जबकि पहले इसमें मांग के अनुरूप निवेश बदलता रहता था.
तीसरा क़दम: मनरेगा को देश के एक तिहाई ग्रामीण हिस्सों तक सीमित किया जाना है. निखिल डे के अनुसार इससे ये क़ानून की बजाय एक स्कीम की तरह दिखेगा.

इमेज स्रोत, AFP
अरूणा रॉय का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार नरेगा क़ानून को ‘राजनीति के खेल’ में उलझा रही है.
भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया
वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वीने बीबीसी हिन्दी को बताया, “पहली बात तो ये है कि खत्म करने का सवाल नहीं है. इस तरह के जो कानून हैं जिसका दुरुपयोग हो रहा हो और जन धन की लूट हो रही हो तो उसका रीव्यू होने में तो कोई हर्ज़ नहीं है.”
उधर निखिल डे ने सरकार से मांग की है कि मनरेगा में किए जा रहे बदलावों को वापस लिया जाए.
मनरेगा में बदलाव के लिए चुना गए रास्ते पर भी उन्हें ऐतराज़ है. उनका कहना है कि इस संबंध में मंत्रियों और सांसदों से भी बातचीत की जाएगी.

निखिल डे ने बीबीसी से कहा, “ये सरकार आई ये कहते हुए कि लोगों को रोजगार देंगे. मनरेगा अच्छी रोजगार योजना नहीं होगी लेकिन इसमें पांच करोड़ लोगों को काम तो मिला तो आप पांच करोड़ लोगों का रोज़गार ले लो. ये जब जनता उठ खड़ी होगी तो मुश्किल होगी. हम लोगों को यही बताने आए हैं कि ऐसा होना गलत है.”
इस संबंध में अरूणा रॉय, निखिल डे, जाने माने अर्थशास्त्री जॉन द्रेज़ समेत कई जानेमाने लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ‘खुला खत’ भी लिखा है.
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