हरियाणा: सिख वोटों पर किसकी दावेदारी?

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- Author, दलजीत अमी
- पदनाम, अम्बाला से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
हरियाणा के विधान सभा चुनाव से पहले भूपिंदर सिंह हुड्डा सरकार ने राज्य के लिए अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी बनाने का कानून पारित किया जो चुनाव में अपना असर दिखा रहा है.
हरियाणा में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं. दोनों का दावा है कि अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी बनाने वाला कानून उनके पक्ष में जाएगा.
शिरोमणि अकाली दल ने इस कानून का विरोध किया था और सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का फैसला दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हरियाणा की नई गठित कमिटी ने कुछ गुरुद्वारों पर कब्ज़ा कर लिया था, जिसमें गुला-चीका का ऐतिहासिक गुरुद्वारा शामिल है.
कांग्रेस को नुकसान

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अकाली दल की अखिल भारतीय वर्किंग कमिटी के सदस्य और हरियाणा इकाई के प्रधान रह चुके सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़ में दावा करते हैं कि तमाम सिख समुदाय अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन का समर्थन करेगा.
अंबाला से तकरीबन 14 किलोमीटर दूर अपने गांव गोबिंदगढ़ में सुखदेव पंजाब से आए अकाली दल के कार्यकर्ताओं की मेज़बानी में लगे हैं.
उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "जब हुड्डा लोक सभा चुनाव हार गए तो उन्होंने अलग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के नाम पर सिखों को रिझाने का काम किया, वह कांग्रेस को उल्टा पड़ेगा. सिख इस फैसले से दुखी हैं. सिखों का नब्बे फीसदी वोट बादल-चौटाला को जाने वाला है."
हुड्डा की कुर्सी दांव पर
जबकि हरियाणा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के समर्थक साहिब सिंह विर्क का मानना है कि हुड्डा ने सिखों का दिल जीत लिया है.
साहिब सिंह अपने गांव पट्टी अफ़ग़ान, डेरा गदला में रणदीप सिंह सुरजेवाला का चुनाव प्रचार करते हुए बताते हैं, "हुड्डा सरकार के फैसले का सिख आबादी वाले 21 हलकों पर दिन और रात जैसा फर्क पड़ेगा. हुड्डा ने अपनी कुर्सी दांव पर लगाकर सिखों के लिए बड़ा काम किया है."

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कैथल विधान सभा में चुनाव प्रचार कर रहे साहिब सिंह हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के उपाध्यक्ष हैं और 'अखिल भारतीय खेत मज़दूर कांग्रेस' संगठन के सचिव हैं.
साहिब सिंह जिन 21 हलकों की बात कर रहे हैं उनमें अकाली दल ने पंजाब के कई नेताओं को चुनाव प्रचार में लगाया है. पंजाब के बहुत से अकाली मंत्री हरियाणा में डेरा डाले हुए हैं.
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल आने वाले दिनों में इन 21 हलकों में चुनाव प्रचार करने वाले हैं.
यह कहना मुश्किल है कि सिख किसी एक पार्टी को वोट डालेंगे. उनके फैसले में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार के समाजिक रिश्ते भी अपनी छाप छोड़ेंगे.
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