जयललिता: कहानी ख़त्म या पिक्चर बाकी है

जयललिता के समर्थक

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, सुधा जी तिलक
    • पदनाम, स्वतंत्र पत्रकार

भारत की सबसे आकर्षक और विवादास्पद राजनेताओं में से एक जयराम जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोपों में चार साल के जेल की सज़ा सुनाई गई. इसके बाद से उनके राजनीतिक करियर पर सवाल उठ रहे हैं.

तमिल फ़िल्मों से राजनीति में पदार्पण करने वाली जयललिता ने राजनीति में भी शीर्ष स्थान हासिल किया. उनके करिश्माई नेतृत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में तथाकथित मोदी लहर के बावजूद उनकी पार्टी एआईडीएमके ने 39 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की.

उनके जेल जाने के बाद क्या भारतीय राजनीति में 'अम्मा' का दौर समाप्त हो गया है?

विस्तार से पढ़िए जी सुधा तिलक का विश्लेषण.

जयललिता ने तमिलनाडु को कितनी तरक़्की दी, इस पर तो लंबी-चौड़ी चर्चा हो सकती है, लेकिन सस्ते खाने की कैंटीन, नमक, दवाखाना, पानी की बोतल, सीमेंट आदि के साथ जुड़े 'अम्मा' शब्द ने उनकी छवि 'ग़रीबों की मसीहा' सरीख़ी बना दी है.

जयललिता अपने समर्थकों के बीच 'अम्मा' के नाम से लोकप्रिय हैं.

उनकी पार्टी ने लोकसभा की 39 सीटों में से 37 पर शानदार जीत हासिल की. उनकी इस जीत का श्रेय बतौर प्रशासक और कल्याणकारी काम वाली उनकी छवि को दिया गया.

व्यक्तित्व पूजा

अम्मा नमक

इमेज स्रोत, imran qureshi bbc

कई लोग मानते हैं कि पूर्व अभिनेत्री से राजनेता बनी जयललिता संभवतः भारत की इकलौती नेता हैं जो अपनी कल्याणकारी योजनाओं के कारण अपनी ऐसी छवि बनाने में सफल हुई हैं.

इसमें अम्मा-ब्रांड वाले सस्ते खाने, पानी और नमक की बड़ी भूमिका है. हैरानी की बात नहीं है कि तमिलनाडु राज्य के कुल खर्च का 37 फ़ीसदी सब्सिडी पर खर्च होता है.

स्तंभकार वी शोभा कहती हैं, "अम्मा-ब्रांड सभी कल्याणकारी योजनाओं की जननी के रूप में उभर रहे है, जो महंगाई की चिंता से मुक्ति दिलाने के साथ जयललिता को महानायक की छवि प्रदान करते हैं."

पिछले सप्ताह जयललिता के जेल जाने के बाद उनके दुखी समर्थकों ने प्रदर्शन किया और वे रोते हुए देखे गए.

राजनीति में 'अम्मा'

और तो और उनकी जगह मुख्यमंत्री बने ओ पनीरसेल्वम शपथ ग्रहण के दौरान रोते हुए दिखे. उनको जयललिता के सबसे वफ़ादार सहयोगियों में गिना जाता है.

अपने लाखों समर्थकों के लिए जयललिता अधिपराशक्ति (यह 1971 में आई उनकी फ़िल्म का नाम भी था) यानी 'सर्वशक्तिमान महिला शक्ति' भी है.

जयललिता

इमेज स्रोत, PTI

पार्टी के पोस्टरों में उन्हें किसी नारी देवी की तरह दिखाया जाता है. भारत की पुरुष प्रधान राजनीतिक संस्कृति में उनको गंभीर महिला के रूप में पेश किया जाता है.

राजनीतिक विश्लेषक सिद्धार्थ वरदराजन कहते हैं, "तमिलनाडु की राजनीति में अम्मा का करिश्मा ऐसी राजनीतिक संस्कृति पर आधारित है जिसमें नेता उपकार करने के लिए समर्थन मांगता है."

जयललिता का जीवन ऐसा है जिसका कोई जीवनी लेखक कल्पना ही कर सकता है. एक युवा लड़की जिसकी यादों में अपने पिता की आत्महत्या है, एक होनहार छात्रा जो कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षिकाओं की चहेती थी, एक आकर्षक अभिनेत्री जिसने 140 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया और एक सफल और शक्तिशाली राजनेता जो फ़िल्म अभिनेता से राजनेता बने एमजी रामचंद्रन की देखरेख में शीर्ष तक पहुंची.

उनकी ज़िंदगी में विवादों की भी मौजूदगी है, आय से अधिक संपत्ति के एक मामले के कारण उनको जेल भी जाना पड़ा.

'व्यक्तित्व का करिश्मा'

जयललिता के समर्थक

इमेज स्रोत, PTI

इतिहासकार रामचंद्र गुहा कहते हैं, "जयललिता ऐसे नेताओं में से हैं जिन्होंने करिश्मे को सत्तावाद में बदला और अपने करिश्मे का इस्तेमाल पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए किया."

कई लोगों का मानना है कि जयललिता ने अपने पहले कार्यकाल में धन और शक्ति का बेज़ा प्रदर्शन करने के साथ-साथ राजनीतिक विरोधियों के ख़िलाफ़ आक्रामक रुख भी अपनाया. लेकिन तीसरे कार्यकाल तक आते-आते उनकी छवि सार्वजनिक कल्याण के प्रतिबद्ध नेता में बदल गई है.

उन्होंने अपने व्यक्तित्व के करिश्मे को बड़ी होशियारी से अपने अनुकूल बनाया है.

वरदराजन कहते हैं, "उन्होंने सीखा है कि नजी संपन्नता पर ध्यान देने से बेहतर है कि सरकार के सार्वजनिक व्यय का व्यक्तिगत श्रेय हासिल किया जाए."

राजनीतिक करियर का सवाल

जयललिता

इमेज स्रोत, PTI

तो क्या जयललिता का राजनीतिक करियर ख़त्म हो गया है? यह कहना कठिन है.

उन्होंने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की है और राहत की उम्मीद कर रही हैं. उन्होंने अपने सबसे विश्वसनीय ओ पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया है.

लेकिन अगर उनको ऊंची अदालतों से राहत नहीं मिलती है तो 66 वर्षीय जयललिता अगले छह साल तक चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगी.

राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी कहती हैं, "वह काफ़ी मज़बूती से अप्रत्यक्ष रूप से सरकार चला सकती हैं. लेकिन इसकी भी अपनी एक सीमा होती है. परोक्ष सरकार के वादों में दम नहीं होता और उनकी पार्टी में दूसरी पंक्ति तो गायब ही है."

मोदी के करिश्मे से सामना

जया की पार्टी को सबसे कठिन चुनौती 2016 के विधानसभा चुनाव में पेश आएगी. पार्टी चाहेगी कि जयललिता पार्टी का नेतृत्व करें, लेकिन क़ानूनन उनको मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनने की अनुमति नहीं होगी.

जयललिता और मोदी

इमेज स्रोत, pmindia.nic.in

इमेज कैप्शन, 2016 के विधानसभा चुनाव में जयललिता को भारत के प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे का सामना करना पड़ सकता है.

इसलिए देखना होगा कि कई धड़ों में बंटी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी वहां की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके क्या छोटे दलों के साथ गठबंधन बनाकर जयललिता की ग़ैरमौजदूगी का लाभ उठा पाएगी?

ऐसे माहौल में क्या भाजपा नरेंद्र मोदी के करिश्मे से जयललिता का विकल्प देते हुए तमिलनाडु में राजनीतिक उपस्थिति का रास्ता बना पाएगी?

वरदराजन कहते हैं, "अम्मा का समय अभी पूरा नहीं हुआ है क्योंकि एआईएडीएमके अम्मा के करिश्मे का पहले से ज़्यादा इस्तेमाल करेगी, क्योंकि उसके पास और कुछ नहीं है."

<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>