स्वच्छ भारत अभियानः बापू किसके हैं?

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्र सरकार इन दिनों 'स्वच्छ भारत अभियान' चला रही है.
सोमवार को मुझे एक सरकारी दफ्तर जाना पड़ा. वहां सीढ़ियों के नीचे थूके गए पान के छींटे देखने के बाद मुझे लगा शायद यहाँ सफाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि यहाँ मीडिया और कैमरों के आने का अंदेशा कम है.
कल शाम मैं एक विदेशी महिला के साथ दिल्ली के प्रसिद्ध कनॉट प्लेस गया.
उन्होंने कहा ये जगह सुंदर है, दुकानें जगमगा रही हैं और इमारतें अच्छी हैं लेकिन इनके सामने हर जगह गंदगी है. उन्होंने पूछा तुम्हारे देश में इतनी गंदगी क्यों है?
मेरे पास कोई जवाब नहीं था. मैंने उन्होंने ये नहीं बताया कि ये 'स्वच्छ भारत अभियान' का सप्ताह है.
सफाई का बीड़ा

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मैंने उन्हें ये भी नहीं बताया कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को देश के नाम अपने भाषण में कहा था, "अगर देश के 125 करोड़ लोग ये तय कर लें कि वो गंदगी नहीं फैलाएंगे तो दुनिया की कौन सी ताक़त है, जो हमारे शहर और गाँवों को गंदा कह सकें."
प्रधानमंत्री अब दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती के अवसर पर खुद ही झाड़ू लेकर सफाई का बीड़ा उठाने वाले हैं.
वो कल राजघाट की यात्रा के बाद सीधे वाल्मीकि सदन जाकर वहां टॉयलेट की सफाई करने वाले हैं.
उन्होंने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भी गांधी के नाम पर भारत को स्वच्छ बनाने की कसम खाई है.
बापू की जयंती

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हो सकता है कि उनके झाड़ू उठाने और टॉयलेट साफ़ करने के बाद उनके मंत्रियों को भी सही पैग़ाम मिल सके क्योंकि इस पूरे हफ्ते रवि शंकर प्रसाद डाकखानों की अलमारियों में गंदगी ढूंढ रहे हैं.
कल पौने दस बजे सरकारी कर्मचारी और मंत्री 100 घंटों की सफाई का संकल्प ले रहे हैं. शायद उसके बाद देश में सफाई नज़र आए.
लेकिन बापू अगर आज ज़िंदा होते तो वो नरेंद्र मोदी के इस सम्मान को किस तरह से देखते?
गांधी जी के पड़पोते तुषार गांधी कहते हैं, "देखिए, मुझे ये स्वीकार करना होगा कि आज़ादी के बाद शायद पहली बार बापू की जयंती सार्थक रूप में मनाई जाएगी. शायद बापू भी इसे सराहते लेकिन वो कितना मन से किया जा रहा है या कितना कैमरे के लिए किया जा रहा है, ये कहना मुश्किल है."
कांग्रेस को शिकस्त

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कुछ लोगों का कहना है कि नरेंद्र मोदी न केवल चुनावों में कांग्रेस को शिकस्त देना चाहते हैं बल्कि कांग्रेस को हर उस व्यक्ति से वंचित रखना चाहते हैं जिस पर कांग्रेस को नाज़ है.
पहले सरदार पटेल को कांग्रेस से छीना और अब बारी है महात्मा गांधी की.
तुषार गांधी कहते हैं कि ये कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है, "मुझे लगता है, ये जायज़ भी है क्योंकि कांग्रेस ने कभी प्रमाणिकता से उन्हें अपनाया ही नहीं सिर्फ इस्तेमाल करने की कोशिश की. मुझे लगता है कि उनको ये तमाचा लगना ज़रूरी था."
साफ सुथरी राजनीति

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तो क्या अब बापू के हत्यारे नाथू राम गोडसे को भी हीरो से जीरो का दर्जा दिया जाएगा?
तुषार गांधी इस बात से परेशान हैं कि अचानक संघ परिवार और नरेंद्र मोदी को गांधी जी की याद कैसे आने लगी?
वो कहते हैं उन्हें संघ परिवार का दोहरा चेहरा दिखाई देता है, "एक तरफ दिल्ली में गांधी जयंती पर सफाई अभियान और दूसरी तरफ महाराष्ट्र में बापू के हत्यारे को बढ़ा-चढ़ा कर एक हीरो की तरह दिखाने का जो नाटक है, उसका प्रदर्शन भी वही ताकतें करवा रही हैं."
बापू किसी एक पार्टी या एक विचारधारा की जागीर नहीं हैं. वो पूरी मानवता के लिए हैं.
गांधी जी के नाम के इस्तेमाल से राजनीति साफ़ सुथरी हो या न हो शहरों और गांवों की सफाई हुई तो उनकी आत्मा को शांति मिल सकती है.
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