बहुओं ने शौचालय के लिए छोड़ा ससुराल

शौचालय को लेकर ससुराल में विरोध करने वाली महिलाएँ

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    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

शौचालय ना होने की वजह से कुशीनगर के खेसिया गाँव की छह बहुएं सोमवार को अपने मायके चली गईं.

उनमें से एक बहू गुड़िया ने कहा, "हमारे घर में शौचालय था इसलिए जब ससुराल में शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था तो बहुत परेशानी होती थी. इसलिए हम अपने पति रमेश शर्मा से झगड़ा कर के चले आए हैं."

गुड़िया के पति दिहाड़ी पर मज़दूरी करते हैं. गुड़िया का मायका कुशीनगर के पड़ोस के ज़िले देवरिया के पांडे गाँव में है.

गुड़िया ने बताया कि उसके घर के शौचालय का पुनर्निर्माण हो रहा था लेकिन बारिश का पानी भर जाने से काम रुका हुआ है.

जो अन्य पांच बहुएं अपने मायके गई हैं, वे हैं नीलम शर्मा, सकीना, सीता, नजरुम निसा और कलावती.

खेसिया गांव

कुशीनगर जिले का खेसिया गाँव

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महिलाओं की समस्याओं को उठाने वाली आशिमा परवीन कहती हैं कि यह सभी नई बहुएं हैं जिनकी शादी डेढ़-दो साल पहले हुई थी.

उन्होंने बताया, "गाँव में नई दुल्हन का बाहर निकलना वैसे ही मुश्किल होता है. इस बरसात के मौसम में जब चारों तरफ़ पानी भरा हो तो शौच के लिए जाना मुसीबत ही है."

आशिमा ने बताया कि गाँव से बाज़ार आठ किलोमीटर दूर है और लौटते समय अँधेरा होने पर औरतों को खुले में ही शौच के लिए जाना पड़ता है.

वे कहती हैं, "ऐसे में जब आती-जाती गाड़ियों की रोशनी पड़ती है तो औरतें खड़ी हो जाती हैं. यह देख कर हमें बहुत दुख होता था और हमने शौचालय बनवाने की मांग भी उठाई."

शौचालय योजना

कुशीनगर के जिलाधिकारी लोकेश एम मानते हैं कि खेसिया गाँव में शौचालय नहीं है. लेकिन वो कहते हैं कि इस समस्या के दो पहलू हैं. पहला तो पैसे की दिक्कत. एक शौचालय बनवाने के लिए केवल दस हज़ार रुपये ही मिलते हैं.

इसमें राज्य सरकार की तरफ से 4,500 रुपये और बाकी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना से केंद्र का अंश होता है.

गाँव की महिलाओं की शौचालय की समस्या

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दूसरा पहलू है कि गाँव वालों को शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए लोगों प्रेरित करना.

उन्होंने बताया, "यहां कितने नुक्कड़ नाटक किए गए. गाँव वालों को समझाया गया कि वे शौचालय का प्रयोग करें लेकिन कोई असर नहीं होता है. 90 फीसदी गाँव के लोगों के पास मोबाइल है लेकिन वो शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते हैं."

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