चार को छोड़कर सभी कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने चार कोयला ब्लॉक को छोड़कर 1993 के बाद हुए सभी आवंटन रद्द कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1993 के बाद से कोयला ब्लॉक मनमनर्ज़ी से आवंटित किए गए.
इस तरह कुल आवंटित 218 कोयला ब्लॉकों में से 214 का आवंटन रद्द कर दिया गया.
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में ये सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश है.
केंद्र सरकार के अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने फ़ैसले के बाद बताया, "सरकार ने अदालत से कहा था कि यदि सभी कोयला ब्लॉकों का आवंटन भी रद्द कर दिया जाता है तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी."

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उन्होंने बताया, "जो कोयला ब्लॉक चालू हैं उनमें से अगले छह महीने तक निजी कंपनियाँ कोयला निकाल सकती हैं."
सिर्फ़ केंद्र सरकार द्वारा संचालित चार कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द नहीं हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया है. कंपनियों को अब तक निकाले गए सभी कोयले पर 295 रुपए प्रति टन सरकार को चुकाना होगा.
साथ ही आगे निकाले जाने वाले सभी कोयले पर भी 295 रुपए प्रतिटन सरकार को चुकाना होगा.

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा है कि सिर्फ़ वहीं खदान जहाँ कोयला निकाला जा रहा है, उन्हें अगले छह महीने तक काम करने दिया जाएगा. चार और खदानों को रद्द नहीं किया गया है."
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह प्रतिस्पर्धी नीलामी से कोयला ब्लॉकों को आवंटित करने के लिए तैयार है.
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