अमित शाह को कोठी मात्र 3,875 में

नई दिल्ली, राजपथ, इंडिया गेट

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कहते हैं कि दिल्ली में किरायेदारों की बड़ी आबादी रहती है. किराये का घर नई दिल्ली के 'लुटियंस बंगलो ज़ोन' में खोजने की बात तो आम आदमी के सोच से भी बाहर की बात है.

लेकिन '11, अकबर रोड' और 'एचबी-4, पुराना किला रोड' के किरायेदारों से उनके किराये के बारे में पूछें तो आप सुनकर ठिठक जाएंगे.

11, अकबर रोड के किरायेदार हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह. टाइप-8 कैटगरी के इस बंगले के वे हर महीने महज 3,875 रुपये चुकाते हैं.

पुराना किला रोड वाले बंगले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात रहते हैं और उनका किराया है महज 3429 रुपये मासिक.

लुटियंस ज़ोन के इन किरायेदारों की हैसियत के बारे में तो किसी से कुछ भी छिपा नहीं है लेकिन राजनीतिक दलों के दफ़्तरों का किराया भी नेताओं के बंगलों की तरह ही है.

आरटीआई कार्यकर्ता डॉक्टर कासिम रसूल इलियास के आरटीआई आवेदन के जवाब में सरकार ने ये जानकारियां मुहैया कराई हैं.

सियासी पार्टियों के दफ़्तर

शरद पवार

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इमेज कैप्शन, शरद पवार की एनसीपी के दफ्तर का किराया 1565 रुपये है.

हालांकि दफ़्तरमूड के मुताबिक दफ्तर बदलेगा रंग! घर नहीं होते और ये बात समझी जा सकती है कि राजनीतिक संगठनों का दफ़्तर चलाने के लिए बड़ी जगह की जरूरत होती है.

10, बीडी मार्ग में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दफ़्तर है और इसका किराया महज 1565 रुपये है.

4, जीआरजी रोड का बंगला बहुजन समाजवादी पार्टी को दफ़्तर के लिए इसी किराये पर दिया गया है.

सत्तारूढ़ भाजपा को 11, अशोक रोड के ऑफ़िस के लिए हर महीने 93,250 रुपये देने होते हैं. हालांकि ये किराया पहले 66,896 रुपया था.

एक से ज़्यादा बंगले

राहुल गाँधी, मोती लाल वोरा

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इमेज कैप्शन, पिछले दिनों कांग्रेस नेता मोती लाल वोरा को कथित तौर पर आवंटित 11 बंगलों को लेकर विवाद हुआ था.

विपक्षी कांग्रेस को 24, अकबर रोड वाले दफ़्तर के लिए 74,509 रुपये लगते हैं.

18, कॉपरनिकस मार्ग वाला बंगला समाजवादी पार्टी को दफ़्तर के लिए आवंटित किया गया है जिसका किराया 20,352 रुपये है.

आरटीआई कार्यकर्ता डॉक्टर कासिम रसूल इलियास ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि मोतीलाल वोरा के नाम से 11 बंगलों के आवंटन का कोई अकेला मामला नहीं है बल्कि कुछ राजनीतिक पार्टियों को भी दफ़्तरों के लिए एक से ज्यादा बंगले आवंटित किए गए हैं.

वे कहते हैं, "सरकार ने बंगलों के आवंटन का आधार और उनके क्षेत्रफल के बारे में सूचना मांगे जाने के बावजूद जानकारी नहीं दी है."

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