बिहार: मोदी को छोड़ सभी पूर्व भाजपा मंत्रियों को घर खाली करने का हुक्म

बिहार में <link type="page"><caption> भाजपा-जदयू गठबंधन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130612_jdu_bjp_stand_ra.shtml" platform="highweb"/></link> टूटने के बाद दोनों दलों के बीच टकराहट का दौर जारी है. ताज़ा मामले में राज्य के भवन निर्माण विभाग ने भाजपा कोटे के पूर्व मंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस थमाया है.
इस पर भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार दुर्भावना के चलते ऐसा कर रही है.
राज्य में <link type="page"><caption> भाजपा-जदयू</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> गठबंधन टूटने के साथ ही भाजपा कोटे के सभी दस मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. इनमें से आठ मंत्रियों से कहा गया है कि वो एक सप्ताह के भीतर सरकारी बंगले को ख़ाली कर दें.
नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर तय समयसीमा के भीतर इन पूर्व मंत्रियों ने अगर बंगला नहीं खाली किया तो उनके खिलाफ़ बल प्रयोग किया जाएगा.
जिन मंत्रियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें राज्य के पूर्व पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह भी शामिल हैं, जो नरेन्द्र मोदी के करीबी बताए जाते हैं.
हालांकि, सरकार में मंत्री रहे सुशील कुमार मोदी और नंदकिशोर यादव को ये नोटिस नहीं दिया गया है, क्योंकि वो विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं.
राजनीतिक संवेदनशीलता
बिहार के भवन निर्माण विभाग के एस्टेट अधिकारी विनोद चौधरी ने बताया कि, "हमने आठ भाजपा विधायकों को नोटिस जारी कर उनसे केन्द्रीय पूल के तहत जारी किए गए बंगलों को खाली करने के लिए कहा है."
उन्होंने बताया कि इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए "उन्हें नोटिस भेजने से पहले विभागीय मंत्री की अनुमति ली गई."
विनोद चौधरी ने कहा कि, "इस नोटिस के बाद अगर मंत्रियों ने बंगला खाली नहीं किया तो एक सप्ताह बाद उन्हें 21 दिनों के भीतर बंगला खाली करने के लिए एक्जि़ट नोटिस जारी किया जाएगा. इसके बाद भी वो बंगला खाली नहीं करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया जाएगा."
उन्होंने कहा कि अतीत में भी मंत्रियों से बंगला खाली कराने के लिए बल प्रयोग किया जा चुका है.
बहुत दी मोहलत

राज्य के भवन निर्माण मंत्री दामोदर रावत ने बताया, "नियमानुसार इन मंत्रियों को 16 जुलाई को बंगला खाली कर देना चाहिए था. इसके बावजूद सरकार ने इन्हें अतिरिक्त एक महीने का समय दिया."
उन्होंने कहा कि चूंकि इन मंत्रियों को बर्ख़ास्त किया गया था, इसलिए इन्हें एक महीने के भीतर बंगला खाली कर देना चाहिए था.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि "हम केवल सेन्ट्रल पूल के कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था कराते हैं, इसलिए इन कर्मचारियों को दूसरा आवास दिलाने की ज़िम्मेदारी हमारी नहीं है."
उन्हें अब विधानसभा द्वारा आवास मुहैया कराया जाएगा.
दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई
इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बिहार भाजपा अध्यक्ष मंगल पाण्डेय ने बताया कि "राज्य सरकार दुर्भावना के चलते मंत्रियों को परेशान करने के लिए ऐसा कर रही है."
उन्होंने कहा कि अभी तक इन मंत्रियों के लिए किसी भी वैकल्पिक आवास का इंतज़ाम नहीं किया गया है, ऐसे में उन्हें उनके आवास से बेदख़ल कैसे किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि सरकार के इस रवैए पर विरोध जताते हुए सभी पूर्व मंत्रियों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है.
दूसरी ओर भवन निर्माण विभाग के एस्टेट अधिकारी विनोद चौधरी ने बताया कि इन मंत्रियों ने अभी तक विभाग के नोटिस का कोई जवाब नहीं भेजा है.
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