'खुले में शौच से मुक्त' भांवरी गांव

भंवरी पंचायत

इमेज स्रोत, Bhanvri Panchayat

    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

राजस्थान के पाली ज़िले का भांवरी अब 'खुले में शौच से मुक्त' गांव बन गया है.

यहां एक महीने में एक हज़ार से ज़्यादा शौचालय बनाए गए हैं.

हर घर में शौचालय का सपना पंचायत समिति की पहल से पूरा हुआ.

भांवरी के सरपंच दलाराम मेघवाल ने बीबीसी को बताया, “हमने एक महीने का संकल्प लिया और जनसहयोग से इसे पूरा किया."

ज़िला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर भांवरी में 1042 घर हैं और यहां की आबादी लगभग 6000 है.

'खुले में शौच से मुक्ति' अभियान के लिए 4600 रुपए निर्मल भारत अभियान और 5600 रुपए मनरेगा के तहत दिए जाते हैं.

फुटरो घर

भंवरी पंचायत

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कनिष्ठ लिपिक कान्हाराम पटेल का कहना है कि ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतज़ार नहीं किया और अपने ख़र्च पर ही निर्माण कार्य करवाया.

यह राशि अभी मात्र 108 लोगों को मिली है और अन्य को सहायता राशि दिए जाने की प्रक्रिया जारी है.

भंवरी पंचायत

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इमेज कैप्शन, ग्रामीणों को प्रमाण पत्र भी दिए गए हैं और शौचालय इस्तेमाल करने का शपथ पत्र लिया गया है

गांव की पुष्पा पटेल घर में शौचालय बनने से बहुत ख़ुश हैं. उनके घर के बाहर 'फुटरो घर' यानी (सुंदर घर) की तख़्ती लग गई है.

गांव में एक भी घर ऐसा नहीं, जिसके बाहर यह तख़्ती न हो. खास बात यह है कि तख़्ती में महिला का नाम पहले है. जैसे पुष्पा के घर के बाहर उनकी सास गंगा बाई पत्नी नरसिंह राम का नाम लिखा है.

दूर तक डंका

भंवरी पंचायत

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पहले गांव की महिलाओं को शौच के लिए क़रीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता था और अंधेरे का इंतज़ार करना पड़ता था.

पुष्पा कहती हैं कि यह काम बहुत बढ़िया हो गया है, वर्ना उन्हें आदमियों की नज़रों से खुद को बचाते हुए रुंखड़ों यानी पेड़ों के पीछे लंबे समय तक बैठे रहना पड़ता था.

छोटी सी पहाड़ी की गोद में बसे भांवरी गांव में इस बदलाव की गूंज दूर-दूर तक पहुंच रही है.

हाल ही में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और महाराष्ट्र से आए दलों ने भी इस अभियान की जानकारी ली.

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