बस ड्राइवर, जिन्होंने दी हादसे की ख़बर

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- Author, देवीदास देशपांडे
- पदनाम, पुणे से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पुणे ज़िले के मालीण गांव में आई प्राकृतिक आपदा की ख़बर प्रशासन को सबसे पहले राज्य परिवहन के बस ड्राइवर प्रताप काले ने दी थी.
घटना के तीन दिन बाद शुक्रवार को वो घोड़ेगाव स्थित अपने घर पहुंचे.
रास्ता बंद होने की वजह से काले अपनी बस के साथ आहुपे गांव में अटके हुए थे.
वो बीस साल से इस मार्ग पर बस चला रहे हैं. काले मालीण गांव के लोगों के मिलनसार व्यवहार को याद करते हैं.
मंगलवार दोपहर साढ़े तीन बजे मनचर छोडने के बाद काले को इस बात का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें तीन दिन तक घर से दूर रहना पड़ेगा और एक कभी न भूल पाने वाली विपदा का गवाह बनना पड़ेगा.
प्रताप कहते हैं, ''मंगलवार शाम आहुपे पहुंचने के बाद हमने रात वहीं गुज़ारी. सुबह छह बजे के आसपास आहुपे से हम निकले. थोड़ी आगे जाने पर एक व्यक्ति ने हमें बताया कि आगे भूस्खलन हुआ है.''
लाल मिट्टी की ढेर

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वो बताते हैं, "पहले तो मुझे लगा कि यह आमतौर पर होने वाली घटना है और एकाध जेसीबी से काम चल जाएगा. लेकिन बस आगे ले जाने के बाद मैंने जो देखा वह भयभीत करने वाला था.''

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प्रताप बताते हैं, "आहुपे मालीण से थोड़ी उंचाई पर है. वहां से पूरा गांव दिखता है. लेकिन उस दिन वहां केवल लाल मिट्टी का ढेर था. हर तरफ़ पानी बह रहा था. सिर्फ़ गांव का स्कूल जो कि थोडी उंचाई पर था, वो दिख रहा था. मैंने तुरंत अपने भाई को फोन किया. वह भी ड्राइवर है और राजगुरुनगर से उसी रास्ते पर आने वाला था. मैंने उसे बताया कि यहां बड़ी दुर्घटना हुई है और मत आओ. इसके साथ ही यह बात मैंने अपने वरिष्ठों को बताने को कहा.''
उन्होंने बताया कि उनके भाई ने ही पुलिस को मालीण गांव में हुई घटना की जानकारी दी.
'हम सकते में हैं'
प्रताप ने बताया, "मालीण का रास्ता पूरी तरह मलबे से पटा था. इस वजह से मुझे और बस कंडक्टर को वहीं रुकना पडा. जब तक गांव में राहत कार्य पूरा नहीं होता, रास्ते पर काम हो नहीं सकता था. इसलिए हम कल रात एक बजे आहुपे से निकले और आज सुबह नारायणगांव में हमने बस पहुंचाई. सुबह छह बजे मैं घर आया.''

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प्रताप काले 1994 से मनचर-आहुपे मार्ग पर बस चला रहे हैं. गांव के हर व्यक्ति से उनकी जान-पहचान थी.
वो कहते हैं, "उनमें से कोई हमारा रिश्तेदार नहीं था. लेकिन वे काफ़ी मिलनसार लोग थे. वे हमेशा हमारे खाने-पीने का इंतजाम करते थे. इतने सारे लोग अचानक ग़ायब हो जाने से हम सभी सकते में हैं."
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