सिविल सेवा विवाद पर मोदी ख़ामोश क्यों?

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    • Author, तुषार बनर्जी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सिविस सेवा परिक्षा के नए पैटर्न का विरोध अब उग्र होता जा रहा है.

एक तरफ़ जहां केंद्र सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए एक और सप्ताह का समय मांग रही है, वहीं छात्रों को लग रहा है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही.

बुधवार रात को भी दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाक़े में छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं जिसमें कई छात्र घायल हो गए.

एक सिविल सेवा अभ्यर्थी कन्हैया पांडे ने बीबीसी को बताया, “शांतिपूर्वक मार्च कर रहे छात्रों पर भी अब लाठियां चल रही हैं. मोदी की सरकार ने बड़ा निराश किया है. हम युवाओं ने उन्हें जिताया, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद तो उन्होंने हमसे मुंह ही फेर लिया.”

क्या है विवाद की जड़?

इस विवाद की जड़ में जो सीसैट परीक्षा है, उसपर रिपोर्ट देने के लिए केंद्र सरकार ने तीन सद्स्यीय पैनेल का गठन किया था. पैनेल ने रिपोर्ट देने के लिए एक और सप्ताह मांगा है.

इधर सिविल सेवा परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी भेज दिया गया.

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छात्रों का आरोप है कि नए सीसैट पैटर्न से भाषाई छात्रों को नुक़सान होगा और अंग्रेज़ी मीडियम के छात्रों को फ़ायदा होगा.

वहीं सिविल सेवा से जुड़े कई अधिकारी मानते हैं कि पेपर पैटर्न में बदलाव की ज़रूरत काफ़ी समय से थी, छात्रों को इसे एक चुनौती की तरह लेना चाहिए.

भारतीय रेलवे से जुड़े सिविल सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “सिविल सेवा परीक्षा को स्टैंडर्डाइज़ करने की ज़रूरत काफ़ी समय से थी. सिविल सेवा अधिकारियों को जिस तरह का काम करना पड़ता है उसके लिए उन्हें एक स्तर की रिज़निंग आनी चाहिए. अंग्रेज़ी भी आनी चाहिए.”

उन्होंने कहा, “मैं ख़ुद भी भाषाई स्कूल में पढ़ा हूं. बहुत मेहनत करनी पड़ी थी इस स्तर तक ख़ुद को लाने में. सिविल सेवा में आने के इच्छुक अभ्यर्थियों को इस बदलाव को एक चुनौती के तौर पर स्वीकार करना चाहिए.”

नए सीसैट पैटर्न के पक्ष में कई अन्य सिविल सेवा अधिकारियों का भी कहना है कि उनके कार्यक्षेत्र में रिज़निंग, क्वांटिटेटिव स्किल्स की ज़रूरत होती है.

उनके अनुसार ऑप्शनल विषय के आधार पर चुने गए अभ्यर्थियों को उनके मनपसंद विषय पर काम करने को मिले ऐसा ज़रूरी नहीं है, इसलिए किसी एक विषय पर निर्भरता छोड़नी चाहिए.

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लेकिन सिविल सेवा अभ्यर्थियों का एक बड़ा हिस्सा इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता.

सिविल सेवा की प्रिलिम्स परीक्षा में पहले जनरल स्ट्डीज़ का एक पेपर और दूसरा पेपर ऑप्शनल विषयों पर आधारित होता था.

लेकिन नए सीसैट पैटर्न में प्रिलिम्स का पहला पेपर जनरल स्ट्डीज़ और दूसरा पेपर क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और अंग्रेज़ी लेख लिखने जैसे सवालों पर आधारित होगा.

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