'इनकार किया तो उन्होंने हम पर बंदूक़ तान दी थी'

इराक से लौटीं भारतीय नर्सें

इमेज स्रोत, AFP

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

इस्लामी चरमपंथी गुट आईएसआईएस की क़ैद से रिहा होने के बाद 46 भारतीय नर्सें अपने घर केरल पहुंच गई हैं. उनके चेहरे पर घर आने की ख़ुशी छिपती नहीं है.

लेकिन कुछ नर्सों को इस ख़ुशी के साथ ही रोजीरोटी की चिंता ने भी घेर लिया है.

नर्स नीति के भाई सोलोमन जॉन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमारे सामने बिलकुल नई परिस्थितियां हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमारा गुज़ारा कैसे चलेगा.’’

वह बताते हैं, ''मेरी बहन छह महीने पहले इराक़ गई थी. उसने भर्ती एजेंट के लिए लिए कर्ज़ के एक लाख 60 हज़ार रुपए में से क़रीब 30,000 चुका दिए हैं, पर पिछले चार महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला है.’’

आर्थिक संकट

जब सोलोमन ने बहन से कर्ज़ का ज़िक्र किया, तो उन्होंने उनसे कहा कि चिंता न करें, किसी तरह कर लेंगे.

आईएसआईएस चरमपंथियों के रुख ने नर्सों की सोच को मज़बूत किया. एक वक़्त ऐसा था, जब तिकरित और अस्पताल पर आईएसआईएस का क़ब्ज़ा हुआ, अधिकांश नर्सें भारत नहीं आना चाहती थीं.

इराक से लौटीं भारतीय नर्सें

इमेज स्रोत, Reuters

46 नर्सों में से केवल 14 नर्सें ही लौटना चाहती थीं. बाक़ी इराक़ में ही किसी दूसरी जगह काम करना चाहती थीं, ताकि वे भर्ती एजेंटों से लिया कर्ज़ और एजुकेशन लोन चुका सकें.

मरीना जोस बताती हैं, "कई नर्सें वापस भारत नहीं आना चाहती थीं, लेकिन जब अस्पताल के बाहर और अस्पताल पर बमबारी होने लगी, तो उन्हें फ़ैसला लेना पड़ा."

मरीना जोस पहली नर्स हैं, जिसने 10 जून को सबसे पहले केरल के मुख्यमंत्री से जान बचाने के लिए गुहार की थी.

मजबूरी में लौटीं

पहली जुलाई को इराक़ी फ़ौजों और चरमपंथियों में अस्पताल के काफ़ी नज़दीक संघर्ष होने के बाद नर्सों को तहखाने में ले जाया गया. तभी से स्थितियां बदल गईं. अस्पताल के मात्र 200 मीटर के दायरे में एक बम फटा.

एक दिन बाद नर्सों को चरमपंथियों ने बस में सवार होने को कहा. सबने इनकार कर दिया.

इराक़ से लौटी भारतीय नर्स

इमेज स्रोत, AFP

जोस ने कोच्चि हवाईअड्डे पहुंचने के तुरंत बाद बीबीसी को बताया, "जब तीसरी बार इनकार किया तो चरमपंथी नाराज़ हो गए. उन्होंने हम पर बंदूक़ तान दी और साथ चलने को कहा. हमने अपने मुख्यमंत्री (केरल के) और भारतीय राजदूत को जानकारी दी. उन्होंने हमें उनके निर्देशों का पालन करने की सलाह दी.’’

शर्मिन वर्गीज़ बताती हैं, "हम जब तीसरे दिन भी बस में नहीं बैठे, तो उन्होंने कहा कि अस्पताल को उड़ा देंगे. हमें मजबूरन उनकी बात माननी पड़ी. हम बस में सवार हो गए और ठीक एक घंटे बाद अस्पताल में विस्फोट हो गया.’’

अच्छा बर्ताव

इराक से लौटीं भारतीय नर्सें

इमेज स्रोत, AFP

वर्गीज़ के मुताबिक़ तिकरित में संकेत मिले कि उन्हें हवाईअड्डे ले जाया जा रहा है, लेकिन जोस को विश्वास नहीं था.

जोस ने कहा, "हमें मोसुल की सड़क पर ले जाया गया. हमें लगा था कि वे हमें कभी नहीं छोड़ेंगे. हमें तीन जुलाई को ही पता चला कि हमें हवाईअड्डे ले जाया जा रहा है."

वर्गीज़ और जोस दोनों मानती हैं कि उनके साथ चरमपंथियों का बर्ताव अच्छा था. "इरबिल ले जाने के पहले उन्होंने हमें खाना दिया और आराम की भी इजाज़त दी. "

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>