बोलना छोड़ अंग्रेज़ी बनाने में जुटे भारतीय

- Author, क्रेग जेफ़्री
- पदनाम, देहरादून, भारत से
यदि आप दिल्ली और मुंबई से बाहर सफर पर हैं तो आपको कई ऐसे लोग मिल जाएंगे जो बात तो हिंदी में करते हैं लेकिन बीच-बीच में अंग्रेज़ी शब्दों का इस्तेमाल ख़ूब करते हैं.
हिंदी बोलचाल में प्रयोग किए जाने वाले कुछ अंग्रेजी शब्द तो ऐसे हैं जिसे ब्रिटेन के लोग भी दशकों पहले भूल चुके हैं. जबकि कुछ शब्द जाने पहचाने तो हैं लेकिन उनका इस्तेमाल काफी अलग और नए तरीके से किया जा रहा है.
ऐसा ही एक आम दृश्य है- युवराज सिंह नाम के एक युवा से मेरी बातचीत चल रही है. वह देहरादून में एक कॉलेज का छात्र है.
बातचीत हिंदी में हो रही है. लेकिन हिंदी में बात करते हुए युवराज 'जॉब', 'लव स्टोरी', या 'ऐड्जस्ट' जैसे अंग्रेज़ी शब्द बार-बार बोलता है.
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मात्र हिंग्लिश नहीं
भारत में आखिर इसका क्या मतलब है? ऐसा तो नहीं कि हिंदी के शब्दकोष में शब्दों की कोई कमी है. युवराज 'जॉब' की जगह 'काम' का प्रयोग कर सकता था.
आख़िर अंग्रेजी शब्द ही क्यों? और युवराज कौन सी भाषा बोल रहा है? क्या ये हिंदी है, अंग्रेजी है, हिंग्लिश है, या कुछ और है?
साल 1886 में हेनरी यूल और आर्थर बर्नेल ने 'हॉबसन-जॉबसन' का प्रकाशन किया था. ये एक गाइड बुक है जिसमें भारतीय भाषा के ऐसे शब्द हैं जिन्हें अंग्रेजी में स्वीकार कर लिया गया है.
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इनमें 'शैंपू' और 'बंग्ला' जैसे शब्द कहां से आए इसकी जानकारी मिल जाएगी. लेकिन हिंदी या तमिल, या बंगाली आदि भारतीय भाषाओं को बोलते समय बहुत बड़ी संख्या में भारतीय अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करने लगे हैं. क्यों?
कई बार तो आप ऐसी जगहों पर भी अँग्रेज़ी की गालियाँ सुन सकते हैं जहाँ सुनने की आपने शायद ही उम्मीद की हो.
आधुनिकता का परिचायक
अंग्रेजी शब्दों के व्यापक पैमाने पर चलन में आने के कई खास कारण हैं. भारतीय समाज में अंग्रेजी बोलने वाले को आधुनिक और सम्मानित व्यक्ति समझा जाता है.
भले ही आप धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना नहीं जानते हों लेकिन यदि बातचीत में बीच-बीच में अंग्रेजी शब्द बोलें तो पड़ोसी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है.
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बातचीत में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते समय कई बार ऐसे शब्द बोले जाने लगे हैं जो अब ब्रिटेन में भी बोलचाल में इस्तेमाल नहीं किए जाते.
सुदूर गांव के पास मैं एक बस में सफ़र कर रहा था और टायर पंचर हो गया. सभी 'स्टेप्नी' चिल्लाने लगे. पहले तो समझ नहीं आया और बाद में पता चला कि स्टेप्नी का अर्थ 'अतिरिक्त टायर' से है. जबकि स्टेप्नी 1910 में टायर बनाने वाली वेल्स की एक कंपनी थी.
दिलचस्प बात ये है कि इस शब्द का इस्तेमाल कॉलेज के छात्र अपनी 'दूसरी गर्लफ्रेंड' के लिए भी करते हैं.
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इसी तरह सेना से जुड़े शब्दों को बोलने की शैली भी खूब प्रचलित है. उदाहरण के लिए एक आम भारतीय 'राशन' खरीदता है. यदि किसी होटल में एक रात रुकना हो तो उसे 'नाइट हॉल्ट' बोलते हैं.
फ़िल्मों का असर

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बॉलीवुड सिनेमा भी हिंदी में बातचीत के अंग्रेजीकरण का बड़ा कारण है. शहरी इलाकों में बोले जाने वाले अधिकतर शब्द नई हिंदी फिल्मों की देन हैं. हाल ही में रीलीज हुई फिल्म 'शादी के साइड इफेक्ट्स' एक अच्छा उदाहरण है. इसके अतिरिक्त, 'लव, ब्रेकअप, जिंदगी', 'मैं तेरा हीरो' जैसे फिल्मों के नामों ने भी असर पैदा किया है.
अंग्रेजी शब्दों के बढ़ते चलन के पीछे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मोबाइल फोन की पहुंच भी एक कारण है. 'मिस कॉल' अब किसी को याद करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला लोकप्रिय शब्द बन गया है. कहा जाता है, "मैं तुम्हें मिस कॉल कर दूँगा."
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भारतीय काफ़ी मौलिक भी हैं. यदि 'टेंशन' शब्द लें तो इसका उपयोग संज्ञा और क्रिया ही नहीं विशेषण के रूप में भी होने लगा है. संज्ञा- 'मुझे टेंशन मत दो' (डोंट गिव मी टेंशन), क्रिया- 'मुझे परेशान मत करो' (डोंट टेंशन मी) और विशेषण- 'परीक्षा काफी तनावपूर्ण रही' (दैट वाज ए वेरी टेंशन इक्जाम).
रचनात्मकता

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इसके अलावा भारत में अंग्रेजी शब्दों से जुड़े कई और नए प्रयोग किए गए हैं. जैसे, 'टाइमपास', मतलब समय गुजारना.
कॉलेज जा रहे युवाओं से जब मैंने पूछा कि क्या कर रहे हो तो तपाक से जवाब मिला, 'कुछ नहीं, 'बस टाइमपास.'
इसी तरह, रेलवे प्लेटफार्म पर अक्सर मूंगफली वाला 'टाइमपास' कह कर मूंगफली बेचता नजर आता है. एक-एक मूंगफली फोड़ना, छिलना और फिर एक-एक दाना खाना लंबी यात्रा में बोरियत दूर करने का यानी टाइमपास का रोचक तरीका है.
विडंबना ये है कि एक ब्रितानी कंपनी ने अपने नमकीन स्नैक को तर्ज पर शुरू किया और उसका नाम रखा, टाइम पास.
रोज़मर्रा की बातचीत में अंग्रेजी शब्दों का जिस स्तर पर प्रयोग हो रहा है उसे 'हिंग्लिश' कहना सही नहीं होगा. लोग हिंदी में अंग्रेजी शब्दों को न केवल मिला रहे हैं बल्कि नए शब्द ईजाद भी कर रहे हैं.
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हैंड-फ्री अंडरपैंट
साल 2006 में भारत की अंतर्वस्त्र बनाने वाली अग्रणी कंपनी ने 'वीआईपी अंडरपैंट' का नया ब्रांड लांच किया. उसने इसके विज्ञापन के लिए एक इंग्लिश शब्द 'ऐडजस्ट' का खूब इस्तेमाल किया.
एक टीवी ऐड में बस के लिए इंतजार करता हुआ आदमी और भीड़ भाड़ में एक आदमी थोड़ा ऐडजस्ट कर लाइन में खड़ा होता हुआ दिखाया जाता है. फिर वह बस की सीट पर बैठने के लिए ऐडजस्ट करता है.
इसी तरह ट्रेन में जगह पाने के लिए, सिनेमा टिकट की कतार में आगे जाने के लिए, बस की छत पर बैठने के लिए ऐडजस्ट शब्द का इस्तेमाल 'थोड़ा ऐडजस्ट कर लेंगे' कह कर किया जाता है.

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विज्ञापन में फिर एक आवाज आती है... 'जीवन में हम कितना ऐडजस्ट करते हैं, लेकिन अपने अंडरवेयर के साथ ऐडजस्ट करना अलग बात है. इस अंडरवेयर के साथ आपको ऐडजस्ट करने की कोई जरूरत नहीं.'
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अंतिम पंचलाइन है, 'वीआईपी भारत का पहला हैंड्स-फ्री अंडरपैंट्स'. गलियों की दुकानों पर 'हैंड-फ्री अडरपैंट' लिखा टंगा है. अंग्रेजी का भारत में फिर से बोलबाला है.
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