छत्तीसगढ़: सबसे आगे भी, सबसे पीछे भी

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाएँ

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, छत्तीसगढ़ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

अभी तक छत्तीसगढ़ को हर मामले में देश में नंबर वन बताने वाली राज्य सरकार ने अब कहा है कि छत्तीसगढ़ देश में सबसे पिछड़ा राज्य है, इसलिए उसे विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए.

राज्य सरकार के दो परस्पर विरोधी दावों को लेकर छत्तीसगढ़ में सवाल खड़े हो रहे हैं.

एक ओर राज्य में विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है, वहीं आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि सरकार के पुराने दावे तथ्यों पर आधारित नहीं थे और इसके लिए आंकड़ों का हेरफेर किया गया था.

इधर सरकार का कहना है कि उसके पुराने दावे भी सौ फ़ीसदी सच थे और नया दावा भी ग़लत नहीं है.

राज़्यों के वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में राज्य का पक्ष रखने वाले छत्तीसगढ़ के वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल कहते हैं, “मामला केवल इतना है कि दस साल पहले छत्तीसगढ़ जिस हाल में हमें मिला था, उसमें लगातार विकास हुआ है लेकिन विकसित राज्य आज जहां खड़े हैं, हम अभी तक वहां नहीं पहुंच पाए हैं.”

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पिछले 11 सालों में साल दर साल छत्तीसगढ़ को देश के सभी राज्यों से आगे बताने का सिलसिला चलता रहा है. एनजीओ, मीडिया घरानों और औद्योगिक घरानों की ओर से हर साल छत्तीसगढ़ को देश में नंबर एक बता कर पुरस्कृत किया जाता रहा है.

सरकार के दावे

अभी कुछ महीने पहले ही राज्य विधानसभा में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने बजट भाषण में कई दावे किए थे.

रमन सिंह ने कहा था, “वर्ष 2004-05 के स्थिर मूल्य पर वर्ष 2013-14 के लिए अग्रिम अनुमान अनुसार राज्य की आर्थिक विकास दर में 7.05 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि इसी अवधि में देश की आर्थिक विकास दर में 5 प्रतिशत से भी कम वृद्धि संभावित है.”

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रमन सिंह ने कहा, “वर्ष 2004-05 के स्थिर मूल्य पर वर्ष 2012-13 के लिए संशोधित अनुमान के अनुसार राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 7.56 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है. देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 4.47 प्रतिशत की तुलना में यह 69 प्रतिशत अधिक है. इसी अवधि में राज्य की कृषि विकास दर, देश की तुलना में छह गुना तथा औद्योगिक विकास दर पाँच गुना है.”

सरकार दावा करती रही है कि भारत की जीडीपी 4.47 प्रतिशत है, जबकि इस समय छत्तीसगढ़ की विकास दर 7.05 प्रतिशत है और लंबे समय तक यह दस फ़ीसदी से ज़्यादा रही है. भारत की कृषि विकास दर 1.41 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह दर 8.89 प्रतिशत है.

आंकड़ों से उलट

सरकारी दावे के अनुसार देश की औद्योगिक विकास दर एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह दर 5.38 प्रतिशत है. छत्तीसगढ़ में सेवा क्षेत्र भी 9.09 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र सात प्रतिशत है.

लेकिन इन आंकड़ों से अलग पिछले पखवाड़े जब दिल्ली में प्रदेशों के वित्त मंत्रियों का सम्मेलन हुआ तो छत्तीसगढ़ के वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल के सारे आंकड़े उलटे हुए थे.

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अमर अग्रवाल ने इस बैठक में कहा कि योजना भारत मानक विकास प्रतिवेदन यानी आईएचडीआर के अनुसार मानव विकास सूचकांक के आधार पर छत्तीसगढ़ देश का सबसे पिछड़ा हुआ राज्य है.

बैठक में उन्होंने कहा कि एनएसएसओ द्वारा वर्ष 2013 में प्रकाशित ग़रीबी सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में बीपीएल परिवारों का अनुपात देश में सबसे अधिक 39.9 प्रतिशत है.

अमर अग्रवाल ने कहा कि रघुराम राजन कमेटी के प्रतिवेदन 2013 के अनुसार छत्तीसगढ़ सबसे कम विकसित राज्यों में से एक है. इसके अतिरिक्त प्रदेश के आधे से अधिक जिले नक्सल समस्या से प्रभावित हैं.

छत्तीसगढ़ को पिछड़ा बताने के लिये उन्होंने इसके समर्थन में कई तथ्य पेश किए. उन्होंने देश में छत्तीसगढ़ को सबसे पीछे बताते हुए केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने की मांग की.

सच है क्या, झूठ क्या ?

छत्तीसगढ़ सरकार पहले झूठ बोल रही थी या अब?

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बीबीसी के इस सवाल के जवाब में अमर अग्रवाल कहते हैं, “मैंने दिल्ली में योजना आयोग और एनएसएसओ के आंकड़े ही रखे हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ सबसे पीछे है. 10 साल से विभिन्न मानकों पर छत्तीसगढ़ आगे रहा है, यह हक़ीकत है और यह दावा भी राज्य सरकार का नहीं है."

छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री रमन सिंह, आदिवासी महिलाएं

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वह कहते हैं, "जो विभिन्न संस्थाएं हैं, जैसे आरबीआई, वह कहती है कि वित्तीय प्रबंधन में छत्तीसगढ़ बेहतर है. देश का सुप्रीम कोर्ट खाद्य सुरक्षा के मामले में छत्तीसगढ़ की प्रशंसा करता है. योजना आयोग भी कहता है कि छत्तीसगढ़ देश में सबसे तेज़ गति से बढ़ता हुआ राज्य है. ”

अमर अग्रवाल ढेर सारे आंकड़ों के साथ समझाने वाले अंदाज में कहते हैं कि छत्तीसगढ़ का पिछले 10 सालों में विकास हुआ है, यह हक़ीकत है. लेकिन हमें और तेज़ गति से आगे बढ़ने के लिए वित्तीय मदद चाहिए.

आंकड़ों का इस्तेमाल

विपक्षी कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मानते हैं कि छत्तीसगढ़ में जीडीपी बढ़ा है लेकिन यह केवल सौ लोगों तक सिमटा हुआ मामला है.

छत्तीसगढ़ को ग़रीब बताए जाने पर जोगी कहते हैं, "छत्तीसगढ़ सरकार ने अपना नक़ाब ख़ुद ही उतार लिया है."

वहीं छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव अमर अग्रवाल से सहमत नहीं.

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बीबीसी से बातचीत में सिंहदेव कहते हैं, “यह इनके दोहरे चरित्र और दोहरे बोल की एक और मिसाल है. छत्तीसगढ़ इससे शर्मशार भी हुआ है. छत्तीसगढ़ के लोगों को इतने सालों तक गुमराह किया गया कि आप बहुत बेहतर तरीक़े से विकसित हो रहे हैं. सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए. लेकिन ये सारे दावे झूठे निकले.”

छत्तीसगढ़, आदिवासी लोग घर लौटते हुए

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आर्थिक मामलों के जानकार डॉक्टर अशोक पारख का कहना है कि आंकड़ों का आप सुविधानुसार इस्तेमाल कर सकते हैं. उसकी व्याख्या किस तरह से की जा रही है, यह सबसे महत्वपूर्ण है. लेकिन डॉक्टर पारख मानते हैं कि छत्तीसगढ़ में विकास की अपार संभावनाएं हैं.

राज्य वित्त आयोग से जुड़े रहे डॉक्टर अशोक पारख कहते हैं, “राज्य में ग़रीबी से इंकार नहीं किया जा सकता और पिछड़ेपन से भी. लेकिन माओवाद जैसी चुनौतियां भी इसी राज्य में हैं ऐसे में राज्य का विकास उस तरीके से तो नहीं हुआ है, जैसा बताया जा रहा है. केंद्र सरकार को चाहिए कि वह राज्य की हरसंभव मदद करे.”

सरकार के आंकड़ों के गणित का सच और झूठ जान-समझ पाना आसान नहीं है. लेकिन इस गणित से राज्य का भूगोल और उसका अर्थशास्त्र अभी भी बेहतर नहीं हो पाया है, इससे तो सरकार भी सहमत है.

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