फिर शुरू हो मध्य पूर्व शांति वार्ता: पोप

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पोप फ्रांसिस ने पश्चिमी तट के शहर बेथेलहम की यात्रा के दौरान <link type="page"><caption> फलस्तीनी और इसराइली</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130808_israel_palestinians_talks_ar.shtml" platform="highweb"/></link> संघर्ष को ख़त्म करने का आह्वान किया है.

उनकी ये टिप्पणी मध्य-पूर्व की तीन दिन के यात्रा के दौरान फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास से मुलाक़ात के बाद आई.

<link type="page"><caption> पोप ने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/04/140426_pope_sainthood_vt.shtml" platform="highweb"/></link> बेथलहम के एक चर्च में लगभग 8,000 लोगों को संबोधित किया. पोप की इस यात्रा का आधिकारिक मक़सद ऑर्थोडॉक्स चर्च के साथ संबंध सुधारना है.

इसके बाद पोप तेल अवीव जाएंगे और फिर उनका येरुशलम जाने का कार्यक्रम है.

हालांकि संवाददाताओं का कहना है कि फलस्तीनी उनसे कुछ समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं. पोप की यह यात्रा इसराइल के साथ <link type="page"><caption> शांति वार्ता</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130730_middle_east_talk_dp.shtml" platform="highweb"/></link> टूटने के कुछ हफ्ते बाद हो रही है.

गहन प्रयास

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इमेज कैप्शन, पोप ने बेथलहम के एक चर्च में लगभग 8,000 लोगों को संबोधित किया

पोप फ्रांसिस सीधे बेथलहम पहुंचे हैं, वो इसराइल के रास्ते यहां नहीं आए हैं.

कई फलस्तीनी इसे उनके स्वतंत्र राज्य के दर्जे की मांग को समर्थन देने के तौर पर देख रहे हैं.

रविवार को बेथेलहम में पोप ने कहा, "अब समय आ गया है जब इस संघर्ष की स्थिति को समाप्त किया जाए, जो अस्वीकार्य तौर पर बढ़ती जा रही है."

उन्होंने इस विवाद के भयावह परिणामों की तरफ़ लोगों का ध्यान खींचा और कहा कि इसका हल 'दो देशों की स्थापना' के प्रयासों को बढ़ावा देकर किया जाना चाहिए.

पोप फ्रांसिस ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनकी मध्य-पूर्व की यात्रा का उद्देश्य पूरी तरह से धार्मिक है.

लेकिन बेथेलहम में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पोप की बेथेलहम यात्रा के पहले दिए गए भाषण से ऐसा लगता है कि वह गंभीर राजनयिक मुद्दों पर भी अपनी राय लोगों के सामने रखना चाहते हैं.

पोप की यात्रा की शनिवार को जॉर्डन से शुरू हुई थी. वहाँ दिए गए एक भाषण में उन्होंने सीरिया के संकट का तुरंत हल तलाशने की ज़रुरत पर बल दिया था.

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