बिजली का कनेक्शन नहीं, लेकिन बिल पहुँच गया

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- Author, रोहित घोष
- पदनाम, कानपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
आज के ज़माने में क्या यह मुमकिन है कि कानपुर जैसे बड़े शहर में एक घनी आबादी वाले इलाक़े में रहने वाला एक परिवार पिछले 10 साल से सिर्फ़ दिया या मोमबत्ती या लालटेन जलाकर गुज़ारा कर रहा है? शायद नहीं.
लेकिन कानपुर के 55/79, बांस मंडी में रहने वाले जावेद अहमद की बातों से यही लगता है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब बिजली का कनेक्शन ही नहीं लिया है, तो बल्ब जलाने या पंखा चलाने का सवाल ही नहीं है."
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जावेद अहमद हाल ही में कानपुर इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड (केस्को) के शिकायत प्रकोष्ठ में लिखित शिकायत लेकर पहुंचे.
उन्होंने अपनी शिकायत प्रकोष्ठ के अधिकारी आरडी पाण्डेय को दी और उनसे कहा, "केस्को ने ग़लत जुर्माना लगाया है मुझ पर. मेरे घर पर बिजली का कनेक्शन नहीं है."
कनेक्शन नहीं है तो चोरी की होगी
जावेद अहमद के शिकायत पत्र पर एक सरसरी निगाह डालते हुए आरडी पाण्डेय ने कहा, "आप का घर दस साल पुराना है. आप दस साल से बिजली चोरी कर रहे होंगे. आपका मामला अब अदालत में पहुंच चुका है. फैसला वहीं होगा. केस्को अब कुछ नहीं कर सकता है."
जावेद अहमद ने तर्क दिया, "मैंने कभी बिजली चोरी नहीं की."
आरडी पाण्डेय ने पूछा, "आपके घर पर बिजली का कनेक्शन है नहीं, बिजली आपने चोरी की नहीं, तो आज के ज़माने में क्या आप अपने घर में चिराग जलाकर रहते हैं, वह भी कानपुर जैसे शहर में?"

जावेद अहमद जवाब में कुछ बोल तो नहीं पाए, पर उनके मुंह से हंसी छूट गई.
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इंजीनियर आरडी पाण्डेय ने बीबीसी को बताया, "कानपुर में बिजली चोरी एक बहुत बड़ी समस्या है. केस्को जितनी बिजली सप्लाई करता है, उसमें से 40 से 50 प्रतिशत की चोरी होती है."
कानपुर की आबादी 40 लाख के क़रीब मानी जाती है. शहर में अवैध घरेलू कनेक्शन की संख्या है करीब पौने पांच लाख. चोरी से लिए गए कनेक्शन की संख्या कितनी है, इसे कोई कैसे जान सकता है?
केस्को के रिकॉर्ड के अनुसार बिजली चोरी के सबसे ज़्यादा मामले आलू मंडी, बेगम गंज, तलाक़ महल, चमन गंज, ग्वालटोली, किदवई नगर, बाबूपुरवा, बाकरगंज इलाक़ों में पाए जाते हैं.
इन सभी इलाकों में घनी आबादी है.
'कटियाबाज़'
आरडी पाण्डेय के नेतृत्व में कुछ सालों पहले उन इलाकों में एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) लगाने का काम शुरू हुआ, जहां बिजली की चोरी बहुत ज़्यादा हुआ करती थी.
एबीसी का जाल तो बिछ गया है, पर बिजली चोरी नहीं रुकी है.
आरडी पाण्डेय ने कहते हैं, 'अब लोग सीधे ट्रांसफ़ार्मर में तार या कटिया लगाकर बिजली चोरी करते हैं,'
कानपुर की बिजली समस्या पर 'कटियाबाज़' नाम की 80 मिनट की डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है.
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कानपुर में उस व्यक्ति को कटियाबाज़ कहते हैं जो बिजली के खंबे या तार से अवैध रूप से तार जोड़कर लोगों के घरों में बिजली पहुंचाता है.
इस डॉक्यूमेंट्री को आलोचकों ने काफ़ी सराहा है.
'कटियाबाज़' के सह-निर्देशक फ़हाद अहमद ने बीबीसी को बताया, 'मैंने अपने बचपन के कुछ साल कानपुर में गुज़ारे हैं और मैं यहां की बिजली समस्या से अच्छी तरह वाकिफ हूं. इसीलिए मैंने यह डॉक्यूमेंट्री बनाई.'
यह डॉक्यूमेंट्री लोहा सिंह नाम के एक कटियाबाज़ के इर्द-गिर्द घूमती है.
चोरी की बिजली से कारखाने?
जब हमने आरडी पाण्डेय से 'कटियाबाज़' के बारे में पूछा तो वो बोले, "कानपुर में अवैध बिजली कनेक्शन देने का एक बहुत बड़ा गिरोह काम कर रहा है. यह कह लीजिए कि वह गिरोह एक समानांतर केस्को चला रहा है."
मोटे तौर पर केस्को एक दिन में बिजली चोरी के 18 मामले पकड़ता है.
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ केस्को ने एक जून, 2013 से 31 जनवरी, 2014 तक करीब 4400 बिजली चोरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की और दंड के रूप में लगभग 15 करोड़ रुपए वसूले.
आरडी पाण्डेय का कहना है, "कोई ग़रीब आदमी भीषण गर्मी के दिनों में बिजली चोरी करके अपने घर में एक पंखा चलाता है, तो बात समझ में आती है, पर कानपुर में तो लोग बिजली चोरी करके कारखाने चला रहे हैं.”
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