आशाओं पर सवार शेयर बाज़ार में उछाल बरक़रार

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भारतीय शेयर बाज़ारों में पिछले एक सप्ताह से दिख रही तेज़ी सोमवार को भी बरक़रार रही.
दिन का कारोबार ख़त्म होने तक बीएसई सेंसेक्स 241 अंकों के उछाल के साथ 24,363 अंकों पर था, जो कि बंद होते वक्त सेंसेक्स का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं निफ़्टी 61 अंको के उछाल के साथ 7,263 अंकों पर बंद हुआ.
सोमवार को निवेशकों ने सरकारी कंपनियों के शेयरों पर भरोसा दिखाया. एनटीपीसी की शेयर की क़ीमतों में 12.2 प्रतिशत और ओओनजीसी की शेयर क़ीमतों में 8.1 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ.
शेयर बाज़ार विशेषज्ञ धीरेंद्र कुमार ने कहा, “सेंसेक्स उतार चढ़ाव के बाद भी एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ बंद हुआ है, इसका मुख्य कारण मिडकैप और स्मॉल कैप इंडेक्स में आई तेज़ी है. हालांकि आज कोई बड़ा दिन नहीं था और चुनावी नतीजे की प्रतिक्रिया शेयर बाज़ार ने शुक्रवार को ही दे दी थी.”
धीरेंद्र कुमार का मानना है कि आने वाले दिनों में जब नई सरकार अपनी ज़िम्मेदारियां संभाल लेंगी और उनकी नीतियां स्पष्ट होने लगेंगी तो इसका और सीधा असर शेयर बाज़ार पर दिखेगा.
इसके साथ ही सोमवार को डॉलर के प्रति रुपए में भी मज़बूती दिखी.
रुपए में मज़बूती
विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय बाज़ार के प्रति आशावादी रुख और ख़रीदारी में तेज़ी की वजह से रुपया डॉलर के मुकाबले 0.7 फ़ीसदी के उछाल के साथ 58.38 रुपए प्रति डॉलर पर पहुंच गया.
हालांकि रुपए के मज़बूत होने का नुकसान टीसीएस और इंफ़ोसिस जैसी आईटी कंपनियों के शेयरों को उठाना पड़ा है. दोनों कंपनियों की शेयर कीमतों में सात से आठ फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

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सोमवार को बीएसई आईटी सूचकांक पांच फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
धीरेंद्र कुमार कहते हैं, “रुपए का मज़बूत होना एक तरह से हमारे बाज़ार के प्रति सकारात्मक रूख के कुछ दुष्परिणामों में से एक है. जब भी रूपया मज़बूत होता है तो इसका असर निर्यात पर पड़ता है और आयात और निर्यात के बीच रिक्ती बढ़ती है.”
हालांकि बाज़ार में आई तेज़ी से बैंकिंग और इंफ़्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को फ़ायदा हो रहा है.
बीते शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ ही सेंसेक्स अपने सबसे ऊंचे स्तर 25,375 पर पहुंच गया था.
विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में 36.34 अरब रुपए की खरीदारी की जो कि मार्च के बाद किसी एक दिन हुई सबसे ज़्यादा खरीदारी है.
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