मोदी की लहर मीडिया की फैलाई अफवाह है: शरद यादव

बीबीसी हिंदी के साथ फेसबुक चैट पर जद यू नेता शरद यादव ने चुनावों में जाति को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और कहा कि मोदी लहर मीडिया की फैलाई अफवाह है.

नरेंद्र मोदी और बीजेपी की लहर के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था, "अब मीडिया में पत्रकार नहीं रह गए हैं. मीडिया सेठ लोग चला रहे हैं. सबको थैलियां पहुंची है और वहीं से लहर आ रही है. प्रेस की आज़ादी एक बड़ा मुद्दा बनना चाहिए."

इन चुनावों में विकास के मुद्दे के बारे में उनका कहना था कि अब भी जाति एक मुद्दा है और इसके साथ और अन्य मुद्दे हैं. उनका कहना था कि जाति का मुद्दा हज़ारों साल पुराना है जो इतनी जल्दी राजनीति से नहीं जाएगा.

उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपनी खटपट की ख़बरों को लेकर भी सारा दोष मीडिया पर मढ़ दिया.

दुविधा

एक फेसबुक पाठक के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "हमारे बयान को तोड़ा मरोड़ा गया. हम ये कह रहे थे कि अगर जनता दल नहीं टूटता तो बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी आज की तारीख में. यही बात एक्सप्लेन कर रहे थे जिसमें से जातिगत राजनीति वाली बात आउट ऑफ कांटेस्ट ले ली गई."

यह पूछे जाने पर कि क्या बीजेपी के साथ संबंध तोड़ने को लेकर वो राज़ी थे तो उन्होंने कहा, "मेरे मन में दुविधा थी लेकिन कांस्टीट्यूशन क्लब में जब कार्यकर्ता आए और उनकी बात हमने सुनी तो हमें लगा कि गठबंधन तोड़ देना चाहिए. ये फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं था."

महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका कहना था कि ये मीडिया की फैलाई अफवाह है कि वो महिला आरक्षण विरोधी हैं.

उनका कहना था, "हम चाहते हैं कि महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिले लेकिन वर्ग होना चाहिए पहले. दलित, आदिवासी, पिछड़े और उच्च वर्ग. इसकी गणना कर लीजिए फिर आबादी के आधार पर आरक्षण दे दीजिए."

नतीजे

बिहार में पार्टी के प्रदर्शन पर उन्होंने यही कहा कि नतीजे आने दीजिए तब पता चलेगा.

चैट के दौरान कई लोगों ने शरद यादव से पूछा कि पार्टी बनारस में केजरीवाल को क्यों समर्थन दे रही है.

उनका कहना था, "बहुत सोच समझ कर फैसला लिया गया था. हमारे पास दो विकल्प थे. या तो समाजवादी पार्टी के चौरसिया जी को समर्थन देते या केजरीवाल को. हमें लगा कि केजरीवाल कड़ी टक्कर देंगे मोदी को. इस पर काफी विचार विमर्श के बाद हमने फैसला लिया था."

यह पूछे जाने पर कि क्या आज के चुनावों में भी जाति एक मुद्दा है तो उनका कहना था, "क्यों नहीं. बिल्कुल है मुद्दा. विकास की बात करने वाले क्यों अपनी जाति बताते फिर रहे हैं."

शरद यादव ने खुल कर श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए और कहा कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों एक ही जैसे हैं.

उनका कहना था, "अगर कांग्रेस रुह है तो बीजेपी शरीर है. सांप्रदायिकता के नाम पर कांग्रेस कभी जम कर नहीं लड़ती है. जबकि बीजेपी का पूरा एजेंडा सांप्रदायिक है."

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