प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह कहां हैं?

मनमोहन सिंह

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पिछले 10 सालों से जो चेहरा हमेशा टेलीविज़न के परदे पर नमूदार रहा हो, आपके ज़हन में छाया रहा हो, भले ही उन्हें सुना कम और देखा अधिक गया हो, वो अब अचानक कहां ग़ायब हो गए हैं?

कहां हैं प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह? नरेंद्र मोदी हर जगह छाए हुए हैं. सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी भी नज़र आ जाते हैं. यहां तक कि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी दिख जाते हैं. लेकिन खास तौर से चुनाव के समय डॉक्टर साहब कहां चले गए.

PGLबुश की कूची से ऐसे दिखते हैं मनमोहनबुश की कूची से ऐसे दिखते हैं मनमोहनकम ही लोगों को पता होगा कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पेंटर भी हैं. उन्होंने दुनिया भर के नेताओं की 24 तस्वीरें बनाई है. इनमें मनमोहन सिंह, व्लादिमिर पुतिन, एंगेला मर्केल, परवेज़ मुशर्रफ़ और दलाई लामा शामिल हैं.2014-04-05T10:02:31+05:302014-04-05T11:21:44+05:30PUBLISHEDhitopcat2

पिछले महीने कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र जारी करने के समय वो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ नज़र ज़रूर आए थे लेकिन पार्टी की चुनावी सरगर्मियों से वो लगभग अलग हैं. उन्होंने अब तक केवल दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया है जो असम और केरल में थीं.

कुछ दिनों में वो दिल्ली में एक आम सभा में भाषण देने वाले हैं लेकिन तारीख अब तक तय नहीं हुई है. पार्टी के कुछ नेताओं ने मुझे बताया कि मनमोहन सिंह को हटाया नहीं गया है बल्कि वो खुद चाहते हैं कि राहुल गांधी ही रैलियों को संबोधित करें. वो अब रिटायरमेंट की तैयारी में जुट गए हैं.

उम्मीदवारों के न्यौते

मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी

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लेकिन सार्वजनिक ज़िन्दगी से टिमटिमाकर नज़रों से ओझल होने वाले डॉक्टर सिंह पार्टी के अंदर अब भी सक्रिय हैं. उन्होंने उम्मीदवारों के नामों को चुनने के लिए पार्टी की चुनाव समिति की 10 बैठकों में भाग लिया है और पार्टी के घोषणा पत्र को आखिरी रूप देने में भी उनकी भूमिका रही है.

STYवह पांच चीज़ें जिनमें चूक गए राहुल गांधीवह पांच चीज़ें जिनमें चूक गए राहुल गांधीराहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राह भारतीय राजनीति में कितनी आसान है और कितनी मुश्किल. ऐसी कौन सी पांच चीज़ें थी जो राहुल को करनी चाहिए थीं, लेकिन वह नहीं कर पाए. कांग्रेस पर '24 अकबर रोड' किताब लिखने वाले रशीद किदवई का विश्लेषण.2014-02-15T20:53:45+05:302014-02-16T07:01:05+05:30PUBLISHEDhitopcat2

लेकिन ये चुनावी रैलियां हैं जहां मनमोहन सिंह नज़र नहीं आ रहे हैं. पार्टी के अनुसार राहुल गांधी और सोनिया गांधी 160 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे जिन में से केवल आठ मनमोहन सिंह के नाम हैं और वो भी पूरी तरह से तय नहीं है.

एक नेता ने कहा, "राहुल सात अप्रैल के बाद चुनावी प्रचार के अंत तक 100 रैलियों को संबोधित करेंगे, सोनिया 60 और मनमोहन सिंह केवल आठ." इस चुनाव के दौरान कांग्रेस के केवल 35 उम्मीदवारों ने प्रधानमंत्री से चुनावी सभाओं में भाषण देने का अनुरोध किया है. मनमोहन सिंह इन सभी उम्मीदवारों के न्यौते स्वीकार नहीं करेंगे.

अगर आप को 2009 का आम चुनाव याद हो तो हाल बिलकुल उलटा था. डॉक्टर मनमोहन सिंह चुनावी मुहिम में आगे आगे थे और उन्होंने कई दर्जन भाषण दिए थे. लेकिन इस बार उनकी मांग भी कम हो गई है और राहुल गांधी की पार्टी पर पकड़ भी मज़बूत हुई है जिसके कारण मनमोहन सिंह की ज़रूरत कम ही महसूस हो रही है.

राजनीतिक भाषण

मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी, शिवराज पाटिल

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दूसरी तरफ कई उम्मीदवार ये मानते हैं कि प्रधानमंत्री के कारण ही आज पार्टी की हालत इतनी ख़राब है. उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने यूपीए-2 सरकार की उपलब्धियों को ठीक से नहीं गिनाया है. अपने 10 साल के कार्यकाल में कम बोलना डॉक्टर सिंह की पहचान बन गई थी. इस अर्से में उन्होंने केवल 33 प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.

STYमनमोहन से सहमत हैं नरेंद्र मोदीमनमोहन से सहमत हैं नरेंद्र मोदीप्रवासी सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सहमत नज़र आए. प्रधानमंत्री ने कहा था कि निराश होने की ज़रूरत नहीं है, अच्छे दिन आएंगे. आम चुनावों से पूर्व इस सम्मेलन में मोदी ने प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना की.2014-01-09T10:55:25+05:302014-01-09T11:44:28+05:30PUBLISHEDhitopcat2

उन्होंने इन 10 सालों में 1197 भाषण दिए जिनमें राजनीतिक भाषण शामिल नहीं हैं. राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी सभी चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं लेकिन सच तो ये है कि पार्टी के अंदर और बाहर डॉक्टर मनमोहन सिंह की कमी खल भी नहीं रही है.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि मनमोहन सिंह लापता नहीं हुए हैं. उन्होंने राहुल गांधी के हक़ में बैक सीट ले ली है. मनमोहन सिंह ने खुद ही ऐसे संकेत दिए हैं कि वो अब संन्यास लेना चाहते हैं लेकिन वो साल 2019 तक राज्यसभा के सदस्य रहेंगे. अगर वो चाहें तो अब भी पार्टी की राजनीति में सक्रिय रह सकते हैं.

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