पत्नी की वजह से उर्दू सीखीः ख़लील तोकार

- Author, अजय शर्मा और अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
लेखक ख़ुशवंत सिंह की याद में हुए जश्ने बहार मुशायरे की एक ख़ासियत थी जापान, तुर्की और ताज़िकिस्तान के उर्दू शायरों की मौजूदगी.
मुशायरे में आए तुर्की के उर्दू शायर प्रोफ़ेसर ख़लील तोकार उर्दू में महारत हासिल करने के पीछे अपनी पत्नी का योगदान मानते हैं.
तुर्की की इस्तांबूल यूनिवर्सिटी में उर्दू के प्रोफ़ेसर ख़लील तोकार की रवां उर्दू ज़बान और उस पर शायरी के तड़के ने जान डाल दी. मास्टर्स कोर्स में उनके प्रिय शायर थे ग़ालिब और इसके बाद शोध के दौरान बहादुरशाह ज़फ़र.
फ़िल्मों से मोहब्बत
बीबीसी से बातचीत में ख़लील तोकार का कहना था, ‘मेरी ज़िंदगी में बदलाव तब आया जब मेरी शादी पाकिस्तान में हुई. मेरे घर में पंजाबी बोली जाती है. मैं शायरी करने के बाद अपनी अहलिया (बीवी) को दिखाता हूं कि वो देख लें कि कैसा लिखा है. उनके कहने के मुताबिक़ अगर अच्छी होती है तो रख लेता हूं, वरना फाड़कर फेंक देता हूं.’
जश्ने बहार मुशायरे के दौरान उन्होंने अपनी ग़ज़ल देखकर पढ़ी. उनका कहना था कि उनके मुल्क में पढ़कर ही शायरी की जाती है. उनकी ग़ज़ल का एक शेर था –
दोस्त के जलवों से मेरी जान में पड़ी आतिशे-इश्क़
रूह को तड़पाती है हरदम ये मेरी आतिशे-इश्क़
ख़लील तोकार को भारतीय फ़िल्मों से भी बहुत प्यार है.
वो बताते हैं, ‘छह साल का था जब सिनेमा में हम हिंदुस्तानी फ़िल्में देखने जाते थे. बचपन से मुझे लगा कि गानों की जो ज़बान है, उसे सीख लूं. बचपन में सभी की ज़बान पर ‘आवारा हूं’ गाना होता था. मगर हम कहते थे ‘आवारा मूं’. जब बड़ा हुआ तो जंगे-आज़ादी के दौरान हिंदुस्तानी मुसलमानों ने काफ़ी मदद की. मेरी उन्हें क़रीब से जानने की इच्छा हुई और उर्दू पढ़नी शुरू की.’
प्रोफ़ेसर ख़लील को एक पाकिस्तानी फ़िल्म का पंजाबी गीत बहुत पसंद है - दुरों दुरों सानू तरसांदे ओ, असी बोल्या इत्थे नहीं आंदे ओ
उन्हें लता मंगेशकर का यह गीत पसंद है- बचपन की मुहब्बत को दिल से न जुदा करना, जब याद मेरी आए मिलने की दुआ करना.
दुश्मनी

भारत और पाकिस्तान की सियासत को लेकर वो कहते हैं- ‘मैं समझ नहीं पाता कि आप लोग जब एक जैसे हैं तो दुश्मनी क्यों है. आप उस्मानियों के बारे में सोचें. यूनान भी हमारी हुक़ूमत में था, सऊदी अरब भी था, पश्चिम में विएन तक. वो सभी हमसे अलग हो गए, पर हम कभी यह नहीं कहते कि वो हमसे अलग क्यों हो गए, क्यों बग़ावत की. ज़माना बदल गया है. अब हम दुश्मनी करें और ये बातें बोलें, तो यह तो अजीब बात होगी.’
प्रोफ़ेसर ख़लील के मुताबिक़ अगर पाकिस्तान और भारत एक दूसरे से टकराने के बजाय दोस्त बन जाएं तो सुपर पावर बन जाएंगे. इसका दुनिया को बहुत फ़ायदा होगा.
तुर्की में भारत को किस नज़र से देखा जाता है? इस पर प्रो. ख़लील कहते हैं, ‘10-15 साल से हिंदुस्तान आगे बढ़ रहा है. हमें खुशी होती है. जिस तरह यूरोप और अमरीका से सारे लोग जुड़े हैं और ऐसे में एक पूर्वी ताक़त को बढ़ते देखकर खुशी होती है. इससे हमें भी फ़ायदा है. हिंदुस्तान को एक चमकता हुआ सितारा होना चाहिए.’
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