अधूरा रह गया प्रमोद मुतालिक का सपना

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलौर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
श्रीराम सेने के मुखिया प्रमोद मुतालिक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महज पांच घंटे तक ही सदस्य रहे. उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली और इसके कुछ घंटे बाद ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
इस नाटकीय घटनाक्रम के साथ ही मुतालिक का मुख्यधारा की राजनीति में आने का सपना अधूरा रह गया.
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष प्रह्लाद जोशी को मुतालिक की सदस्यता रद्द करने का आदेश दिया.
कर्नाटक भाजपा के प्रवक्ता एस प्रकाश ने बीबीसी को बताया, "पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष को मुतालिक की सदस्यता रद्द करने को कहा था."
क्या होगा असर
हालांकि प्रमोद मुतालिक उत्तरी कर्नाटक के पांच से छह लोकसभा सीटों पर असर डाल सकते हैं.
एस प्रकाश ने बीबीसी को बताया, "उत्तर कर्नाटक में कई उम्मीदवार उनके हैं. हम मतों का विभाजन रोकना चाहते थे, लेकिन उन्हें पार्टी में शामिल करना पार्टी नेतृत्व और आम लोगों को पसंद नहीं आया."
मुतालिक पहली बार तब चर्चा में आए थे, जब उनके लोगों ने साल 2009 में मंगलौर में एक <link type="page"><caption> पब</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2009/01/090126_karnataka_pub_ac.shtml" platform="highweb"/></link> में कुछ महिलाओं पर हमला किया था. महिलाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था. इस घटना का वीडियो टीवी चैनलों पर ख़ूब दिखाया गया था.
इस घटना के दो साल बाद मुतालिक एक स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े गए थे. इसमें वो पैसे लेकर सांप्रदायिक दंगे कराने की बात कह रहे थे.
इसके बाद भाजपा के कई नेता यह मानते थे कि मुतालिक भाजपा में आना चाहते थे.
वोटों का घाटा
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, "वह पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे, हमने उनसे कहा कि यह संभव नहीं होगा. लेकिन हम मानते हैं कि उनके उम्मीदवार हमारे पांच से दस हज़ार वोट ज़रूर काटेंगे."
मुतालिक ने धारवाड़ ज़िले में श्रीराम सेने के उम्मीदवार खड़े किए थे, जहां से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रह्लाद जोशी उम्मीदवार हैं.
मुतालिक के भाजपा में शामिल होने पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया में जमकर प्रतिक्रिया हुई. विपक्षी नेताओं के साथ-साथ महिलाओं ने इसकी कड़ी आलोचना की.
प्रमोद मुतालिक को हुबली में जब भाजपा में शामिल किया गया, उस समय वहाँ मौज़ूद एक नेता ने कहा, ''ईमानदारी से अगर कहें तो हमें यह उम्मीद नहीं थी कि इस तरह की प्रतिक्रिया होगी.''
राजनीतिक विश्लेषक स्वपन दासगुप्ता ने ट्वीट किया, ''मुतालिक किसी समझदार संगठन के सदस्य नहीं हो सकते. भाजपा को उन्हें उनके संगठन में वापस भेज देना चाहिए.''
मॉरल पुलिसिंग
मुतालिक को पार्टी में शामिल करने और इस ख़ुशी की मिठाई बांटने के पाँच घंटे के बाद लोगों के बढ़ते दबाव को देखते हुए पार्टी के <link type="page"><caption> केंद्रीय नेतृत्व</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2009/01/090127_rajnath_pubviolence_as.shtml" platform="highweb"/></link> ने जोशी को मुतालिक की पार्टी की सदस्यता रद्द करने को कहा.
सामाजिक कार्यकर्ता विद्या दिनकर कहते हैं, ''मंगलौर में पब पर हुए हमले के बाद भाजपा पर इसका असर पड़ा था. कर्नाटक के पूरे तटीय इलाक़े में नरमपंथी हिंदुओं के वोट कांग्रेस में चले गए थे. यह लोगों की स्वतंत्रता का अपमान था.''
वह कहते हैं, ''साल 2008 से 2013 के बीच भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई नैतिक पुलिसिंग की घटनाएं आज भी जारी हैं.''
कहा जा रहा है कि तटीय इलाक़े में श्रीराम सेने का प्रभाव कम हुआ है. लेकिन उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़, हावेरी, बेलगाम और अन्य चुनाव क्षेत्रों में उसके समर्थकों का आधार अभी भी है.
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