वोट के लिए अब ज़रूरी नहीं दूसरे की नज़र

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भारत के आम चुनावों को दुनिया में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव कहा जाता है. राजनीतिक नारेबाज़ी और चुनाव प्रचार के अनोखे अंदाज़ के अलावा भी इस उत्सव में कई ऐसे रंग हैं, जो दिल को छू लेते हैं.
हैदराबाद के देवनार स्कूल फॉर दि ब्लाइंड में ऐसे ही एक रंग को देखा जा सकता है.
यहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के लिए ऐसी स्ट्रिप तैयार की जा रही हैं, जिसकी मदद से दृष्टिहीन लोग भी वोट दे सकेंगे.
इस विद्यालय ने दृष्टिहीन लोगों को वोट देने में मदद करने के लिए हजारों स्ट्रिप तैयार की हैं.
इस विद्यालय की स्थापना 1992 में की गई थी.
ब्रेल स्ट्रिप
इस ब्रेल स्ट्रिप को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में लगाया जाएगा. इन स्ट्रिप को छूकर दृष्टिहीन लोग अपने मनपसंद चुनाव चिह्न के बारे में जान सकेंगे और अपने प्रत्याशी को वोट दे सकेंगे.

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भारत में लोकसभा चुनावों के तहत पहले चरण का मतदान सात अप्रैल को होगा.
देवनार स्कूल फॉर दि ब्लाइंड की स्थापना करने वाले डॉक्टर ए साईबाब गौड़ के मन में सबसे पहले इस तरह की ब्रेल स्ट्रिप तैयार करने का विचार आया.
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गुप्त मतदान

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इस बीच दृष्टिहीन लोगों के एक संगठन ने अदालत में अपील की है कि दृष्टिहीन लोगों को किसी दूसरे की मदद के बिना मतदान की सुविधा मिलनी चाहिए. इसके बाद चुनाव आयोग ने गौड़ से संपर्क किया.
इससे पहले दृष्टिहीन लोग किसी दूसरे व्यक्ति का मदद से अपना वोट डालते थे. इसमें एक दिक़्क़त यह थी कि उनका मत सार्वजनिक हो जाता था, जबकि भारत में गुप्त मतदान की व्यवस्था है.
दूसरे, दृष्टिहीन व्यक्ति को इसका भरोसा कैसे हो कि मत उसकी पसंद के उम्मीदवार को ही दिया गया है. हो सकता है कि वोट डालने वाले ने किसी दूसरे उम्मीदवार को वोट दे दिया हो.
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हरी झंडी

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चुनाव आयोग की पहल के बाद गौड़ ने आयोग से एक इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन मांगी और विद्यालय में उन्होंने और उनके कर्मचारियों ने इस पर काम किया. उन्होंने एक ऐसी स्ट्रिप तैयार की, जिस पर हर उम्मीदवार का सीरियल नंबर ब्रेल लिपि में लिखा था.
इस स्ट्रिप का परीक्षण स्कूली बच्चों पर किया गया और जब सब कुछ एकदम सही पाया गया, तो इसे चुनाव आयोग की हरी झंडी मिल गई.
अब हर चुनाव में इस ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है. इस मशीन की मदद से दृष्टिहीन लोग पूरे सम्मान के साथ अपना वोट अपने मनपसंद उम्मीदवार को दे सकते हैं. वो भी बिना किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लिए.
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