क्या दक्षिण भारत में है 'मोदी की लहर' ?

नरेंद्र मोदी

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दक्षिण भारत से लौट कर

हैदराबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर इब्राहिम पटनम क़स्बा आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना बनने के बाद इस नए राज्य का हिस्सा होगा. इस क़स्बे में तेलंगाना के हिमायती भरे पड़े हैं.

इब्राहिम पटनम के लोग <link type="page"><caption> तेलंगाना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140218_modi_karnataka_davangere_rally_ar.shtml" platform="highweb"/></link> बनने से ख़ुश तो हैं लेकिन आम चुनाव के दिन इनमें से अधिकतर भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वोट देंगे.

यहां रहने वाले श्रीनिवासन अपने मोटरसाइकिल पर बैठे सिगरेट का एक लम्बा कश लेने के बाद कहते हैं, "राष्ट्रीय स्तर के चुनाव में हमारा वोट मोदी को जाएगा. मेरे विचार में वो सबसे क़ाबिल प्रशासक हैं."

'मोदी लहर' के रुझान को दक्षिण भारत में महसूस करना दक्षिण भारत के मेरे दौरे का एक मक़सद रहा. यहां नरेंद्र मोदी के विरोधी या कुछ निष्पक्ष लोग तर्क दे रहे हैं कि असल में देश भर में 'मोदी लहर' नहीं बल्कि कांग्रेस विरोधी हवा चल रही है.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि इब्राहिम पटनम के लोग कांग्रेस से नाराज़ हैं या, मोदी की लहर के प्रभााव में आए हुए मतदाता ?

तेलंगाना देने को वाले को वोट

वेंकटेश <link type="page"><caption> तेलुगु देशम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/03/120303_andhra_mla_disqualify_vd.shtml" platform="highweb"/></link> के कार्यकर्ता हैं. उनकी दिली तमन्ना है कि उनकी पार्टी और भाजपा का चुनावी गठजोड़ बन जाए. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो?

कर्नाटक

वेंकटेश कहते हैं, "आम चुनाव में मेरा वोट मोदी को ही जाएगा और विधानसभा में तेलुगु देशम को."

इब्राहिम पटनम से कुछ दूर एक गाँव है जहाँ दलित बहुमत में हैं. वहां हमने युवाओं और महिलाओं से पूछा कि इस दलित गाँव में मोदी लहर है या नहीं?

वर्षा रानी 18 साल की हैं और पहली बार वोट डालने वालों में से एक हैं. वे कहती हैं, "हमें जिसने तेलंगाना दिया है हमारा वोट उसको जाएगा". उनका इशारा <link type="page"><caption> कांग्रेस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120615_andhra_analysis_of_ak.shtml" platform="highweb"/></link> की तरफ था.

इस पिछड़े गाँव के लोगों की राय वर्षा रानी की राय से मिलती-जुलती थी. जब एक जगह इकट्ठा हुए कुछ युवाओं से पुछा गया कि क्या आप मोदी को जानते हैं तो जवाब आया 'हाँ'. लेकिन उनका वोट मोदी को नहीं मिलेगा.

<link type="page"><caption> आंध्र प्रदेश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120614_ap_byeelex_results_ia.shtml" platform="highweb"/></link> के दौरे के बाद ये बात सामने आई है कि अगर भाजपा ने तेलुगु देशम पार्टी से गठजोड़ किया तो इसे चुनाव में फ़ायदा होगा लेकिन इसका मुख्य कारण मोदी नहीं होंगे बल्कि क्षेत्रीय पार्टियों से दोस्ती इसका कारण बन सकती है.

सख़्त मुक़ाबला

आंध्र प्रदेश

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पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की बात करें तो इसके बारे में यही कहा जा रहा है कि न तो वहाँ भाजपा का ज़ोर है और न ही मोदी की लहर. राज्य में हर जगह या तो जयललिता का प्रभाव था, या करूणानिधि का.

इसके अलावा वहां कुछ इलाक़े ऐसे भी हैं जहाँ भाजपा केवल नरेंद्र मोदी के कारण काफ़ी मज़बूत नज़र आई.

कन्याकुमारी चुनावी क्षेत्र एक बार भाजपा की झोली में जा चुका है. यहाँ पिछला चुनाव डीएमके ने जीता था. लेकिन इस बार यहां मोदी की लहर भी देखने को मिली.

कन्याकुमारी यूनिट के भाजपा नेता विश्व कुमार कहते हैं, "कन्याकुमारी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है. हमारे पास दो लाख 80 हज़ार समर्थक हैं. इस बार ये सीट हमारी पार्टी को मिलेगी"

विश्व कुमार का दावा है कि पूरे क्षेत्र में 'मोदी लहर' है. उनके साथियों ने बताया कि यहाँ मुक़ाबला हमेशा सख़्त होता है और अगर इस बार भाजपा जीती तो इसका मुख्य कारण मोदी ही होंगे.

कन्याकुमारी से टैक्सी में कोच्चि तक के 6 घंटे को सफ़र के दौरान रास्ते भर नरेंद्र मोदी की शक्ल पोस्टर से बाहर निकलती दिखाई दी. इस राज्य में कांग्रेस और कम्युनिस्टों का ज़ोर रहता है.

कन्याकुमारी में पोस्टर तो हर जगह मोदी के नज़र आए लेकिन यहाँ के अधिकतर लोगों के दिलों-दिमाग़ में अब तक मोदी नहीं समा पाए हैं.

क्षेत्रीय पार्टियों का ज़ोर

वहीं कर्नाटक की बात बिल्कुल अलग है. बंगलौर के युवा मोदी से काफ़ी प्रभावित नज़र आते हैं. कई युवाओं ने बताया कि वो मोदी को पसंद करते हैं और उनका वोट मोदी को ही जाएगा.

तेलंगाना

मंगलोर से आए कुछ युवाओं ने बताया कि उनका वोट मोदी को जाएगा क्योंकि मोदी एक दबंग नेता के रूप में उभरे हैं. लेकिन यहां कुछ ऐसे लोग भी मिले जो कांग्रेस से तंग आकर मोदी को वोट देने की बात कर रहे थे. वे नए चेहरों को वोट देने के मूड में नज़र आए.

दक्षिण के राज्यों में कर्नाटक ऐसा अकेला राज्य है जहाँ भाजपा हावी नज़र आती है. बंगलौर में भाजपा के उम्मीदवार बार-बार नरेंद्र मोदी का नाम अपने भाषणों में लेते हैं.

पूरे दक्षिण भारत के दो हफ़्तों की यात्रा के दौरान यही बात सामने आई कि नरेंद्र मोदी अब एक क्षेत्रीय नेता से राष्ट्रीय स्तर के नेता बनने में कामयाब हुए हैं.

कुछ इलाक़ों में नरेंद्र मोदी की लहर तो है लेकिन अधिकतर इलाक़ों में क्षेत्रीय पार्टियों का ज़ोर है. यहां जगह जगह कांग्रेस पार्टी से नाराज़गी का भी अहसास हुआ.

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