'तुम चेहरे से जेबकतरे लगते हो..'

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मुंबई के मुंब्रा इलाक़े के रशीद कंपाउंड में गुरुवार रात पुलिस <link type="page"><caption> मुस्लिम समुदाय</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140301_modi_muslim_election_an.shtml" platform="highweb"/></link> के 80 लोगों को थाने ले गई थी. यह मामला अब तूल पकड़ रहा है.
पुलिस कार्रवाई की शिकायत <link type="page"><caption> अल्पसंख्यक आयोग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140119_religious_hostilities_ap.shtml" platform="highweb"/></link> से भी की गई है.
पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में रोष है जबकि पुलिस के मुताबिक़ किसी को हिरासत में नहीं किया गया था, केवल पूछताछ के लिए लाया गया था.
'बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक'
आरोप है कि पुलिस ने इन लोगों को बिना कोई कारण बताए कई घंटे तक थाने में बिठाकर रखा.

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स्थानीय निवासी शहज़ाद पूनावाला ने अल्पसंख्यक आयोग से शिकायत की है.
पूनावाला के मुताबिक़,"एसीपी अमित काले की अगुवाई में यह कार्रवाई की गई. इसमें <link type="page"><caption> पुलिस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140307_mumbai_navy_dockyard_accident_dil.shtml" platform="highweb"/></link> जिन्हें उठाकर ले गई, उनमें स्कूल में पढ़ रहे लड़कों से लेकर 80 साल तक के बुज़ुर्ग शामिल हैं."
जिन लोगों को थाने ले जाया गया था उनमें 19 साल के मोहसिन और 20 साल के रमीज़ भी शामिल थे.
मोहसिन कहते हैं,"मैंने अभी 12वीं कक्षा की परीक्षा दी है. जब मैंने पुलिस को यह बताया तो उन्होंने कहा कि तुम जेबकतरे लगते हो."
'भेदभावपूर्ण कार्रवाई'
रमीज़ ने बीबीसी को बताया,"रात में क़रीब दो बजे के आसपास पुलिसवाले दरवाज़ा खटखटाने लगे. मेरे घर में अम्मी और बहन सो रहीं थीं. मैं अंदर बेडरूम में सो रहा था. अचानक पुलिस के आने से सब लोग घबरा गए. मेरी मां दिल की मरीज़ हैं. उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. पुलिसवालों ने मुझे पकड़ा और कहा- चल गाड़ी में बैठ."
मोहसिन का कहना है कि पुलिस ने कई लोगों को छोड़ दिया था मगर उन्हें बिठाकर रखा.
एनसीपी के स्थानीय विधायक जीतेंद्र आव्हाड़ के हस्तक्षेप के बाद मोहसिन को पुलिस ने छोड़ा.
एसीपी अमित काले ने बीबीसी को बताया,"किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया था. उन्हें केवल पूछताछ के लिए लाया गया था. जब बाहर लोगों ने हंगामा करना शुरू किया, तो उनसे पूछताछ भी पूरी नहीं हो पाई."
शहज़ाद पूनावाला ने अपनी शिकायत में लिखा है,"इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई के लिए दो महिला कॉन्स्टेबलों समेत तक़रीबन 200 की संख्या में पुलिस वाले आए थे."
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