अदालत ने सहारा के प्रस्ताव को 'अपमानजनक' बताया

सुब्रत राय

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सु्प्रीम कोर्ट ने निवेशकों के पैसे लौटाने के सहारा समूह के प्रस्ताव को 'अपमानजनक' बताया है. सहारा ने अदालत से निवेशकों के प्रारंभिक राशि 2500 करोड़ रुपए तीन दिनों और शेष राशि हर तीन महीने पर क़िस्तों में जमा करने का भरोसा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा,''ये काफी अपमानजनक है. आप हमारे पास तब तक न आए जब तक आपके पास इससे बेहतर कोई प्रस्ताव नहीं हो. ये एक बेईमानी वाला प्रस्ताव है. ''

अदालत में सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के अलावा अन्य दो निदेशकों की रिहाई की गुहार लगाई थी. सहारा का कहना था अगर इस मामले में देरी होती है तो इससे सहारा समूह के लिए फंड इकट्ठा करना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि अदालत ने उनकी इस अपील को भी खारिज कर दिया.

सहारा इंडिया ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि तीन दिनों में 2500 करोड़ रुपए जमा कराने के बाद शेष रक़म को हर तीन महीने पर समान क़िस्तों में जमा कर दिया जाएगा.

अदालत ने अपने आदेश में 65 वर्षीय सहारा प्रमुख को अगली सुनवाई तक जेल में रहने का आदेश दिया है हालांकि अदालत ने ये भी कहा सुब्रत ''एक ठोस प्रस्ताव ''लेकर आते हैं तो इस मामले की सुनवाई पहले भी हो सकती है.

सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी.

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निजी क्षेत्र में सहारा समूह देश का एक बड़ा नियोजक है और उसे 17,500 करोड़ रुपए का भुगतान करना है. सहारा ने अदालत को जानकारी दी है कि वे इस राशि का भुगतान संपत्तियों को बेच कर करेगा जिसके दस्तावेज़ सेबी के पास हैं.

कोर्ट के निर्देश पर सहारा के प्रस्ताव का जांच पड़ताल कर रही सेबी का कहना है कि बकाया राशि 37,000 करोड़ रुपए है न कि उतनी जितना सहारा दावा कर रहा है.

मंगलवार को अदालत ने सहारा के 22,000 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी देने वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

साल 2012 में अदालत ने सहारा समूह को 30 लाख निवेशकों को करीब 24,000 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया था जिसमें से ज्यादातर ग्रामीण निवेशक थे.

सहारा का कहना था कि उसने ज्यादातर राशि का भुगतान कर दिया है और अब बकाया राशि 5000 करोड़ रुपए से भी कम की है जिसे उसने सेबी में जमा करा दिया है. लेकिन सहारा ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी कि उसने ये राशि लौटाई कैसे है.

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