छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में पांच पुलिसकर्मी मारे गए

छत्तीसगढ़ में नक्सली
    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में हुए एक माओवादी हमले में पांच पुलिसकर्मी मारे गए हैं जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.

मारे गए लोगों में कोंडाकुआं थाना के प्रभारी विवेक शुक्ल भी शामिल हैं.

पुलिस अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि पुलिस दल पर नक्सली हमला उस वक़्त हुआ जब वह दंतेवाड़ा के कुंआकोंडा से बचेली की ओर जा रहे थे.

पुलिस के अनुसार, पुलिस का यह दल बीच रास्ते में माओवादियों के हमले की चपेट में आ गया और पांच पुलिसकर्मियों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई.

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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि पुलिसकर्मी सड़क बनाने में लगे हुए कर्मचारियों और मशीनों की सुरक्षा में लगे हुए थे.

हथियारों की लूट

गुप्ता ने बताया कि नक्सलियों ने मारे गए पुलिसकर्मियों के हथियार भी लूट लिए. घायल पुलिसकर्मियों को दंतेवाड़ा से रायपुर ले जाया जा रहा है.

पुलिस का कहना है कि नक्सली दंतेवाड़ा और बस्तर के सुदूर इलाक़ों में टूटी हुई सड़कें बनाने नहीं दे रहे और पहले भी सड़क निर्माण से जुड़ी करोड़ों रूपए की संपत्ति जला चुके हैं.

अधिकारियों का कहना है कि इस सड़क पर माओवादी पहले ही से घात लगाकर बैठे हुए थे. लगभग छह दोपहिया वाहनों पर सवार होकर पुलिसकर्मी इलाके की गश्त कर रहे थे.

माओवादियों ने पुलिसवालों के चार वाहनों को आग भी लगा दी. इस बीच विस्फोट की भी ख़बरें हैं लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

बारूदी सुरंगों का जाल

नक्सलियों पर आरोप है कि उन्होंने कई बार सड़क के निर्माण में तैनात कर्मचारियों और इंजीनियरों का अपहरण भी किया है. अकेले बस्तर सम्भाग के बीजापुर ज़िला मुख्यालय से गंगालूर तक की 30 किलोमीटर लम्बी सड़क को बनाने में 150 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

सुकमा को आंध्र प्रदेश से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का भी यही हाल है जहाँ पिछले कई सालों से सड़क निर्माण का काम सम्भव नहीं हो पा रहा है.

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बल

अधिकारियों का कहना है कि जो ठेकेदार या कंपनी इस सड़क के निर्माण का काम लेती है, उसे माओवादियों द्वारा काम नहीं करने दिया जाता है. अलग-अलग कंपनियों ने बस्तर के कई इलाक़ों में निर्माण का काम अधूरा ही छोड़ दिया है और वहाँ से अपना सामान समेट लिया है.<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140217_chattisgarh_media_censorship_rd.shtml" platform="highweb"/></link>

इन इलाक़ों में काम करने से मना करने वाली संस्थाओं में 'बार्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन' भी शामिल है.

चाहे दंतेवाड़ा हो, सुकमा या बीजापुर, बस्तर के दक्षिणी इलाक़ों में माओवादी छापामारों ने बड़े पैमाने पर बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है. इस इलाक़े में चल रहे छापामार युद्ध में बारूदी सुरंगों के विस्फोट की वजह से सबसे ज़्यादा नुक़सान सुरक्षा बलों को ही उठाना पड़ा है.

सुरक्षा बलों के वाहन अक्सर बारूदी सुरंगों की चपेट में जा जाते हैं, इसलिए इन इलाक़ों में सुरक्षा बलों को ताक़ीद की गयी है कि वह ज़्यादातर इलाक़ों में पैदल ही गश्त किया करें.

शुक्रवार को दंतेवाड़ा में हुई घटना के बारे में कहा जा रहा है कि पुलिसकर्मियों से चूक हो गयी क्योंकि वो इस संवेदनशील इलाक़े में पैदल चलने की बजाय वाहन पर सवार होकर जा रहे थे.

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