सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर वोट में तब्दील होंगे?

रियायती गैस सिलेंडरों की संख्या में बढ़ोत्तरी तो होनी ही थी. अगर राहुल गांधी एक जनसभा में प्रधानमंत्री से कोई सिफारिश करें तो समझ लीजिये इसे टालना असंभव है.
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री से सिफ़ारिश की थी कि सिलेंडरों की संख्या नौ से बढ़ाकर बारह कर दी जाए.
केंद्र सरकार ने इसके बाद स्पष्ट संकेत दिए कि राहुल गांधी की बात मान ली गई है, बस औपचारिकता और घोषणा का इंतज़ार था जिसे गुरुवार को पूरा कर दिया गया.
राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमिटी की बैठक में यह फैसला हुआ. बैठक के बाद एक अप्रैल से 12 रियायती रसोई गैस सिलेंडर देने का एलान किया गया. साथ ही फ़रवरी और मार्च महीने में भी दो सिलेंडर रियायती दरों पर ही दिए जाएंगे.
कितना चुनावी फायदा

इमेज स्रोत, Reuters
इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी को आधार कार्ड के ज़रिए बैंक में ट्रांसफर करने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी है.
इस बारे में कहा गया कि इस प्रक्रिया में कुछ तकनीकी मुद्दे सामने आ गए हैं जिन्हें हल करने की कोशिश की जा रही है.
केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने इस बाबत जानकारी देते हुए कहा कि सब्सिडी पर दिए जाने वाले इन सिलेंडरों की संख्याबढ़ाने से केंद्र पर पाँच हज़ार करोड़ रुपए का भार बढ़ेगा.
इसमें कोई संदेह नहीं कि केंद्र सरकार का आम जनता को दिया गया ये नया तोहफ़ा सीधे आगामी आम चुनाव से जुड़ा है.
ज़ाहिर है इस फ़ैसले का कांग्रेस और केंद्र की सरकार में भागीदार पार्टियां स्वागत करेंगी.
लेकिन क्या इससे कांग्रेस को चुनावी लाभ होगा? इसका जवाब देना कठिन है, लेकिन इस नई सब्सिडी से जिन्हें लाभ होगा उनकी संख्या पर ध्यान दें तो शायद इसे समझना आसान होगा.
देश भर में रसोई गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं की संख्या केवल 15 करोड़ है जबकि देश की आबादी 128 करोड़ है. इन 15 करोड़ उपभोक्ताओं में से 89 प्रतिशत उपभोक्ता नौ सिलेंडर सालाना इस्तेमाल कर रहे थे.
कम से कम 10 प्रतिशत उपभोक्ता 9 से अधिक सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे थे जो वो बाज़ार दर पर खरीद रहे थे. अब 12 सिलेंडर करने से इन उपभोगताओं को भी लाभ होगा.
आरबीआई की चिंता

इन 15 करोड़ उपभोक्ताओं में से अधिकतर शहरों में रहते हैं और ग़रीबी रेखा से कहीं ऊपर के लोग ही इनका आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं.
देश की बहुसंख्यक आबादी अब भी गाँवों में रहती है और रसोई गैस खरीदना उसके बजट से बाहर है. वो खाना पकाने के लिए अब भी किरासन तेल या लकड़ियों का इस्तेमालकरते हैं.
तो अगर इस तोहफे का कांग्रेस को फायदा हुआ भी तो ये शहरी आबादी तक सीमित रहेगा. इसका दूसरा पहलू यह है कि अधिकतर उपभोक्ताओं की मांग थी कि सिलेंडरों की संख्या 12 होनी ही चाहिए.
महीने में एक सिलेंडर इस्तेमाल करना तो सामान्य सी बात है, तो 9 से 12 करने पर शायद वो राहत की सांस तो लेंगे लेकिन इसे सरकार का एहसान न समझें.
इस फ़ैसले का आर्थिक परिणाम ये होगा कि हर साल पाँच हज़ार करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ सरकार को उठाना पड़ेगा. सरकार पहले ही रसोई गैस सिलेंडरों को रियायती दरों में बेचती है जिस पर वीरप्पा मोइली के अनुसार अप्रैल से सरकार आठ हज़ार करोड़ रुपये खर्च करेगी.
आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक ग़ैर ज़रूरी सब्सिडी कहा है जिसके आर्थिक परिणाम अच्छे नहीं होंगे, ख़ास तौर से ऐसे समय में जबकि अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि पाँच प्रतिशत सालाना से नीचे रहने की सम्भावना है.
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