राहुल के बारे में फ़ैसला अंतिमः सोनिया

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दिल्ली में हो रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में अपना भाषण शुरू करने से पहले ही सोनिया गाँधी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार न बनाए जाने का कांग्रेस कार्य समिति का फ़ैसला अंतिम है.
सोनिया जब अपना भाषण देने के लिए मंच पर आईं तब पार्टी कार्यकर्ता राहुल गाँधी के नाम के नारे लगा रहे थे इसलिए अपना भाषण शुरू करने से पहले ही सोनिया गाँधी ने ज़ोर देकर कहा कि राहुल के बारे में लिया गया फ़ैसला अंतिम है.
अपने भाषण में सोनिया गाँधी ने कहा कि पार्टी धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए समर्पित रहेगी. सोनिया ने कहा, "हम स्पष्ट संकेत देना चाहते हैं कि कांग्रेस चुनावी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. इन चुनावों में विपरीत विचारधाराओं के बीच कड़ी टक्कर होगी."
सांप्रदायिक ताकतें ख़तरा
विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोनिया ने कहा, "देश को सांप्रदायिक ताकतों और विचारधाराओं से सबसे बड़ा ख़तरा है. कांग्रेस हमेशा लोगों को एक दूसरों से जोड़ने के रास्ते पर चलती रही है. कांग्रेस मिली जुली राष्ट्रीय पहचान के साथ सभी को एक सूत्र में बाँधती रही है."
"हमारे मुख्य राजनीतिक विरोधी कट्टरता और द्वेष फ़ैलाने के रास्ते पर है. वे एकरूपता के नाम पर देश पर कट्टरता थोप रहे हैं. उनका रास्ता हिंसा भड़काने का है. इस तरह की विचारधारा को कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है. एक कांग्रेसी के रूप में हमें ये कहते हुए गर्व होना चाहिए कि हमने इस तरह की सांप्रदायिक विचारधारा के ख़िलाफ़ हमेशा संघर्ष किया है."
सोनिया ने कहा, "धर्मनिरपेक्षता हमारी चुनावी मजबूरी नहीं बल्कि हमारी गहरी आस्था है."
उन्होंने कहा, "देश में उथल पुथल है. आकांक्षाओं से भरी हुई पीढ़ी चाहती है कि उनकी आवाज़ सुनी जाए. हमारी नीतियों ने सबकी आकांक्षाओं को बढ़ाया है. इन्हीं आकांक्षाओं से मध्यवर्ग पैदा हुआ है. कभी-कभी लगता है कि हम मध्यमवर्ग की आकांक्षाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाए."
सोनिया ने कहा कि मैं सभी लोगों से नरम रुख अपनाने का अनुरोध करती हूँ लेकिन जो लोग हमारा सिर्फ़ विरोध करते हैं उन्हें एक पल के लिए भी यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे राष्ट्रीय जीवन का प्रत्येक बड़ा परिवर्तन हमारी पार्टी के माध्यम से ही हुआ है.

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मुश्किल में भी ज़िंदा
सोनिया गाँधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बहुत मुश्किल दौर में भी ज़िंदा रही है और उसे अपने सिद्धांतों पर गर्व है. सोनिया ने कहा, "कांग्रेस ने बहुत मुश्किल समय देखा है, आज से भी ज़्यादा मुश्किल लेकिन हमने कभी भी हौसला नहीं खोया है."
सोनिया गाँधी ने अपने भाषण में मनरेगा योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस योजना से गाँवों में रोज़गार बढ़ा है. भ्रष्टाचार पर बोलते हुए सोनिया ने कहा, "बुराड़ी में दो साल पहले भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए पाँच सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की थी. तब से लोकपाल पास हो चुका है. फ़रवरी 2014 के अंत तक कांग्रेस शासित सभी राज्यों में लोकायुक्त पास हो जाएगा."
सोनिया ने कहा, "अवसरों की ग़ैर बराबरी एक और बड़ा ख़तरा है. ग़ैर बराबरी को मिटाने का सबसे प्रभावी तरीका शिक्षा है इसलिए हमने शिक्षा के अधिकार का क़ानून बनाया है."
राहुल का विकल्प नहीं
सोनिया गाँधी के भाषण के दौरान बार-बार राहुल गाँधी के नाम का शोर होता रहा. सोनिया का भाषण ख़त्म होते ही पार्टी प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कार्यकर्ताओं को समझाते हुए कहा, "क्या राहुल जी के अलावा दूसरा नाम है. क्या पार्टी में राहुल गाँधी का कोई विकल्प है? क्या कांग्रेस में कभी नेतृत्व को लेकर दुविधा रही है?"
द्विवेदी की बात से जब कार्यकर्ता नहीं माने तब स्वयं राहुल गाँधी ने कहा कि पार्टी के फ़ैसले को लेकर मेरे मन में क्या है यह मैं अपने भाषण में स्पष्ट कर दूंगा.
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