मोबाइल इंडियन: इंजीनियर ने मोबाइल पर ही लिख दी किताब

मोबाइल इंडियन
    • Author, तुषार बनर्जी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

अपने स्मार्टफ़ोन पर एक दिन में कितना टाइप कर सकते हैं आप? 100 शब्द.......200 शब्द? बंगलौर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने मोबाइल पर ही पूरा उपन्यास लिख दिया.

एक बड़ी आईटी कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत 38 वर्षीय विद्याशंकर हरप्पनहल्ली बस से ऑफ़िस आते जाते हैं, जिसमें उन्हें क़रीब एक घंटे का समय लगता है. इसी समय का उपयोग वो मोबाइल पर लिखने-पढ़ने के काम में करते हैं.

साहित्य के शौकीन विद्याशंकर की नींद एक दिन बुरे सपने के साथ खुली जिसे लेकर पहले तो वो परेशान हुए, लेकिन बाद में ऑफ़िस जाने के रास्ते में उन्होंने उस सपने को शब्दों में पिरोकर मोबाइल पर टाइप किया और फ़ेसबुक पर डाल दिया.

उनके मित्रों ने कमेंट कर उन्हें कहानी आगे बढ़ाने को कहा और वो मान गए. अपने सपने को एक कहानी की तरह वो रोज़ अपनी बस यात्रा में आगे बढ़ाते गए. इस पूरी प्रक्रिया में मोबाइल ने एक अच्छे दोस्त की तरह उनका साथ दिया.

ऑफ़िस आने-जाने का समय

विद्याशंकर कहते हैं, "मुझे साहित्य पढ़ने का काफ़ी शौक़ है लेकिन मेरी व्यस्त दिनचर्या की वजह से मैं ज़्यादा पढ़ नहीं पाता था. तब मैंने एक मोबाइल ख़रीदा और इसी पर पढ़ने लगा. इससे मेरी दैनिक यात्रा में लगने वाले समय का बहुत अच्छा और सकारात्मक उपयोग होने लगा."

विद्याशंकर का दावा है कि करीब तीन सप्ताह में उन्होंने मोबाइल पर ही पूरा उपन्यास लिख लिया.

वे कहते हैं, "एक सपने के साथ शुरू होने वाले इस उपन्यास, 'कनसिना चिट्टेया हिडियेलु हॉरटू' (सपनों की एक तितली की खोज में) में 12 अध्याय हैं, जिसमें दूसरे से बारहवें अध्याय तक की कहानी काल्पनिक है. ये मेरी और एक काल्पनिक तितली के बीच के संवाद पर आधारित है."

सबसे ख़ास बात ये है कि विद्याशंकर ने मोबाइल पर ये किताब कन्नड़ भाषा में लिखी जो कि मोबाइल कीबोर्ड पर काफ़ी जटिल होती है.

72 पन्नों का उपन्यास

विद्याशंकर बताते हैं कि 72 पन्नों के इस उपन्यास की कहानी जब उन्होंने ख़त्म की तब एक मित्र ने उन्हें इसे एक किताब के रूप में छपवाने की सलाह दी. विद्या अपनी कहानी के साथ एक प्रकाशक के पास गए और वो इसे छापने के लिए राज़ी हो गए. इसी सप्ताह उनकी किताब रिलीज़ भी हो गई.

मोबाइल इंडियन

मोबाइल पर कहानियां या किताब लिखने का रुझान अमरीकी, यूरोपीय और कुछ एशियाई देशों में आम है लेकिन विद्याशंकर का दावा है कि किसी भी भारतीय भाषा में ये पहली बार है जब मोबाइल पर लिखी कोई किताब छपी हो.

मोबाइल पर किताब लिखने का सबसे पहला मामला साल 2003 में जापान में पेश आया था, जब योशी नाम के एक व्यक्ति ने ‘डीप लव’ नाम का उपन्यास मोबाइल पर लिखा था. इस उपन्यास की कहानी एक ऐसे युवा के इर्द गिर्द घूमती है जिसे प्यार और डेटिंग के दौरान एड्स हो गया था. बाद में इस कहानी पर फ़िल्म और धारावाहिक भी बने.

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